द्रमुक ने बुधवार को पार्टी की एक अहम बैठक में मोदी सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पर्यावरण समेत दूसरे अन्य मुद्दों पर केंद्र को आड़े हाथों लिया। द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 नहीं लागू करने की मांग की है।
साथ ही पर्यावरण प्रभाव आकलन मसौदे को लेकर जारी अधिसूचना को वापस लेने का आग्रह किया। शिक्षा नीति का तमिलनाडु समेत दक्षिण के कई राज्यों में कड़ा विरोध हो रहा है। इन राज्यों का आरोप है कि एनईपी के तहत मोदी सरकार उन पर हिंदी को थोपने का प्रयास कर रही है।
बुधवार को जनरल काउंसिल बैठक की अध्यक्षता पार्टी प्रमुख स्टालिन ने की। द्रमुक ने नई शिक्षा नीति और पर्यावरण के अलावा पिछले साल आयोजित संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति के सामाजिक न्याय के अधिकार छीनने की कड़ी आलोचना की और इसकी जांच की मांग की।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत एनडीए सरकार शिक्षा के केंद्रीयकरण का प्रयास कर रही है, जो स्वीकार्य नहीं है। शिक्षा आयोग विश्वविद्यालयों को केंद्र के नियंत्रण में लाना चाहता है। शिक्षा के अधिकार में केंद्र दखल देने का प्रयास कर रहा है। द्रमुक ने तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक सरकार से एनईपी का विरोध करने की अपील की। पार्टी ने कहा कि यह राज्य की दो भाषा की नीति के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री भी जता चुके हैं विरोध
पिछले महीने तमिलनाडु सरकार ने नई शिक्षा नीति में प्रस्तावित केंद्र के तीन भाषा के प्रावधान को खारिज किया था। मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी ने कहा था कि तमिलनाडु में दशकों से लागू दो भाषा की नीति पर ही अमल किया जा रहा है, जिसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हम केंद्र की तीन भाषा की नीति का पालन नहीं करेंगे। राज्य दो भाषा (तमिल और अंग्रेजी) की अपनी नीति पर कायम रहेगा।