तेलंगाना के भाजपा नेता मर्री शशिधर रेड्डी ने तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर डीएमके के विरोध को चुनावी रणनीति बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा विधेयक की प्रति जलाना राजनीतिक कदम है।
तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता मर्री शशिधर रेड्डी ने मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा परिसीमन विधेयक की प्रति जलाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि डीएमके का विरोध आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर सुनियोजित तरीके से किया गया है।
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रेड्डी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि पिछले साल चेन्नई में स्टालिन की अगुवाई में हुई सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी से यह मांग की गई थी कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का आवंटन 2026 के बाद भी जारी रखने का आश्वासन संसद में दिया जाए।
परिसीमन को लेकर क्या बोले?
उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रस्ताव 1971 के आधार पर सीटों के मौजूदा वितरण में कोई बदलाव करने का नहीं है, बल्कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का है, ताकि लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण लागू किया जा सके। रेड्डी ने कहा कि दशकों से राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी, खासकर पूर्व कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार के दौरान, इस मुद्दे के समाधान में बाधा रही है।
रेड्डी ने परिसीमन को दक्षिणी राज्यों के खिलाफ साजिश बताने के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि एक दक्षिण भारतीय होने के नाते वह केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव का स्वागत करते हैं, क्योंकि इससे लंबे समय से लंबित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करने का रास्ता साफ होगा। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम को राजनीतिक दूरदर्शिता का उदाहरण बताते हुए उनका आभार भी जताया।