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तमिलनाडु में सीट बंटवारे पर फंसा पेच: स्टालिन ने CPIM को पांच सीटों का दिया ऑफर, जानें कहां अटक रही बात

Sun, 22 Mar 2026 07:02 PM IST
Himanshu Singh Chandel न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

तमिलनाडु चुनाव से पहले डीएमके ने सीपीआईएम को पांच सीटों का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वाम दल ने अभी फैसला नहीं लिया है। सीपीआईएम कम से कम छह सीटों की मांग पर कायम है। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन खुद बातचीत में शामिल हुए और समझौते की अपील की।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राजनीति तेज हो गई है। सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों के बीच खींचतान साफ दिखाई दे रही है। इसी बीच डीएमके ने अपने सहयोगी सीपीआई को पांच सीटों का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वामपंथी दल ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। इससे गठबंधन के अंदर हलचल बढ़ गई है।

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करीब 20 दिनों से चल रही बातचीत के बाद डीएमके प्रमुख और मुख्यमंत्री एम के स्टालिन खुद बातचीत में शामिल हुए। उन्होंने सीपीआई(एम) से 5 सीटों के प्रस्ताव को स्वीकार करने की अपील की। हालांकि सीपीआई(एम) पहले से ही ज्यादा सीटों की मांग कर रही है और वह कम से कम छह सीटें चाहती है, जो उसे पिछली बार मिली थीं।

सीपीआई(एम) ने शुरुआत में दो अंकों में सीटों की मांग रखी थी, लेकिन गठबंधन में नए दलों के जुड़ने के कारण उसने अपनी मांग कम कर दी। पार्टी अब कम से कम 6 सीटों पर अड़ी हुई है। नेताओं का कहना है कि 2021 में भी उन्होंने 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इसलिए इस बार इससे कम सीटें स्वीकार करना मुश्किल है।
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डीएमके के सामने क्या चुनौती?
डीएमके के लिए सीटों का बंटवारा आसान नहीं है, क्योंकि उसके गठबंधन में कई नए दल शामिल हो चुके हैं। ऐसे में सभी सहयोगियों को संतुलित तरीके से सीट देना बड़ी चुनौती बन गया है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने भी बातचीत के दौरान इसी मजबूरी का जिक्र करते हुए सीपीआई(एम) से समझौता करने की अपील की है।

क्या टूट सकता है गठबंधन?
सीपीआई(एम) ने साफ किया है कि वह गठबंधन छोड़ने जैसा कोई कदम नहीं उठाएगी। पार्टी नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर अटकलें लगाना सही नहीं है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक में लिया जाएगा, जो जल्द होने वाली है। अब सबकी नजर सीपीआई(एम) की अगली बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि पार्टी पांच सीटों का प्रस्ताव मानती है या छह सीटों की मांग पर कायम रहती है। तमिलनाडु चुनाव से पहले यह सीट बंटवारा गठबंधन की ताकत और रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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