भाजपा के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी के दिल्ली के हिंसा ग्रस्त इलाके में दौरे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 50 वर्ष के राहुल गांधी को कब कहां जाना है, इसकी जानकारी नहीं है। भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि इस समय देश में कोरोनावायरस के संक्रमण की खबर आ रही है। सरकार अपने नागरिकों के जान माल की सुरक्षा के उच्च स्तर पर प्रयास कर रही है और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को दिल्ली की गलियों में घूमकर लोगों के जख्म कुरेदकर राजनीति सूझ रही है।
यह पूछने पर कि दिल्ली हिंसा के बाद केंद्रीय गृहमंत्री क्यों नहीं उतरे? पार्टी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह लगातार अपना काम कर रहे हैं। वह दिल्ली में शांति और सद्भाव की स्थापना में लगे हैं। उन्होंने बुधवार को भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की है। लेकिन राहुल गांधी क्या कर रहे हैं? वह तो केवल राजनीति कर रहे हैं।
बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अध्यक्ष के आसन पर नहीं बैठे। अपनी ड्यूटी के प्रति पाबंद बिरला अपने चैंबर में रहे। उनके स्थान पर किरीट सोलंकी ने सभापति के आसन से कार्यवाही का संचालन किया। दोपहर बाद मीनाक्षी लेखी ने इस दायित्व को निभाया। लोकसभा अध्यक्ष के अपने आसन पर न आने को लेकर लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों में भी चर्चा चलती रही।
बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष मंगलवार को सदन में हुई घटना से क्षुब्ध हैं। हालांकि इस बारे में कोई अधिकारिक बयान नहीं आया है। कांग्रेस पार्टी के नेता लोकसभा अध्यक्ष के आसन पर न आने को लेकर खुलकर कुछ नहीं कहना चाहते। पार्टी के लोकसभा में नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि उन्होंने लोकसभा में दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे पर चर्चा का मुद्दा उठाया है। पार्टी अपने रुख पर कायम है। जब तक संसद में चर्चा नहीं होगी, कांग्रेस के सांसद चुप नहीं बैठेंगे।
कांग्रेस पार्टी के एक अन्य नेता का कहना है कि विपक्ष तो चर्चा की मांग करेगा, यह उसका काम है। आसन को अपनी निष्पक्षता बनाए रखने चाहिए। सूत्र ने कहा कि संभव है कि विपक्ष की दिल्ली में हिंसा पर चर्चा की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष कुछ असहज महसूस कर रहे हों। यह भी संभव है कि व्यस्तता के कारण न आए हों।
लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस समेत विपक्षी दल दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा पर चर्चा चाहते हैं। केंद्र सरकार इस चर्चा को होली के त्यौहार के बाद चाहती है। विपक्ष के नेता सरकार की इस योजना को लेकर आशंकित हैं। उनका मानना है कि केंद्र सरकार इस दौरान दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा को अपने हिसाब से कलेवर दे सकती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि अभी चर्चा से दूर भागकर केंद्र सरकार अपनी नाकामी छिपाना चाहती है।
बताते हैं केंद्र सरकार की इस मंशा को देखकर ही राहुल गांधी कांग्रेस के सांसदों के साथ दिल्ली के हिंसा प्रभावित क्षेत्र में उतरे हैं। ताकि वह लोगों के जख्मों पर मरहम लगा सकें। कांग्रेस के नेता तरुण गगोई का कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में लोगों के बीच में आए हैं तो इसमें क्या बुराई है।
भाजपा उपाध्यक्ष श्याम जाजू ने कहा कि उन्हें कांग्रेस के नेताओं पर तरस आता है। कोरोना वायरस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला संक्रमण है। केंद्र सरकार इससे निबटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। इसलिए इसे दिल्ली हिंसा से जोड़कर इतना अराजनीतिक, असंवेदनशील बयान किसी राजनीतिक दल के नेता को नहीं देना चाहिए।
श्याम जाजू ने होली बाद संसद में दिल्ली हिंसा पर चर्चा की बात पर कहा कि राज्यसभा और लोकसभा की कार्यवाही को चलाना दोनों सभापति का काम है। वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। उन्होंने इस बारे में केवल इतना कहा कि भाजपा के सांसदों और केद्र सरकार के पास विपक्ष के हर सवाल का जवाब है। सरकार किसी भी चर्चा से न तो भाग रही है और न ही रक्षात्मक हो रही है।
गृहमंत्री अमित शाह की भूमिका को लेकर श्याम जाजू ने कहा कि उन्होंने सकारात्मक कदम उठाया। चार घंटे के भीतर दिल्ली में अमन और शांति लौटी, लेकिन कानूनी मामलों में वह क्या कर सकते हैं। इसके सामानांतर भाजपा उपाध्यक्ष ने कांग्रेस नेताओं पर आरोप लगाए।