केएचडीएफ के पास मौजूदा समय में 18 सदस्यों का समर्थन है, जिसमें 12 एनपीपी और छह कांग्रेस के सदस्य है। वहीं निवर्तमान यूडीए के पास 12 सदस्यों का समर्थन है।
मेघालय के सत्तारूढ़ गठबंधन की अगुवाई वाली पार्टी एनपीपी ने विपक्षी कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया है। पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगी यूडीपी को बाहर का रास्ता दिखा दिया दिया है। इसके बाद एनपीपी के एक नेता ने एक स्वायत्त जिला परिषद की कार्यकारी समिति का प्रमुख पद संभाल लिया।
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जानकारी के मुताबिक, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के खासी हिल्स स्वायत्त जिला परिषद के सदस्य पिनीएड सिंग सयीम ने टिटोस्टारवेल चाइन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक एलायंस कार्यकारी समिति के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया, जिसके चलते यूडीपी सोमवार को 30 सदस्यीय सदन में अल्पमत में आ गई। एनपीपी के बाजोप पिनग्रोप के अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अपनी हार के बाद स्वायत्त जिला परिषद में चाइन के नेतृत्व वाली कार्यकारी समिति ने अपना बहुमत खो दिया।
खासी हिल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (केएचडीएफ) के प्रमुख सयीम ने मंगलवार को मुख्य कार्यकारी सदस्य के रूप में शपथ ली। इस पद के लिए कोई अन्य दावेदार नहीं था। एनपीपी का एक नेता एक स्वायत्त जिला परिषद की कार्यकारी समिति का प्रमुख बन गया है। परिषद को संचालित करने के लिए एनपीपी-कांग्रेस गठबंधन को केएचडीएफ नाम दिया गया है। वर्तमान परिषद का पांच साल का कार्यकाल अगले साल की शुरुआत तक है।
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इस बीच कांग्रेस ने परिषद में एनपीपी को समर्थन के अपने फैसले का बचाव किया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता आरवी लिंगदोह ने कहा कि राज्य के आदिवासी लोगों के हितों की रक्षा के लिए पार्टी (कांग्रेस) परिषद में एनपीपी का समर्थन कर रह है। यदि हम एनपीपी का समर्थन नहीं करते तो किसी भी दल को पर्याप्त बहुमत नहीं मिलता और परिषद की बागडोर प्रशासक को सौंपी जा सकती थी।