फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhimashankar: ज्योतिर्लिंग पर असम के दावे पर सियासत, MVA ने महाराष्ट्र की विरासत छीनने की कोशिश का लगाया आरोप

Wed, 15 Feb 2023 10:26 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

द्वादश ज्योतिर्लिंग में छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर असम लंबे समय दावा करता रहा है कि असली भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग उसके यहां है। वहीं, महाराष्ट्र लगातार इसका विरोध करता रहा है। इस समय ये मुद्दा तब गरमाया जब असम सरकार ने मंगलवार को देश के अखबारों में विज्ञापन जारी कर भीमाशंकर मंदिर असम में डाकिनी पहाड़ी पर होने का दावा करते हुए महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया।
विज्ञापन
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग - फोटो : facebook/TempleConnect
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक भीमाशंकर की आराधना के लिए भले ही शिव भक्त महाराष्ट्र के पुणे नगर में स्थित उनके मंदिर जाते हैं। बावजूद इसके भीमाशंकर के महाराष्ट्र में होने पर असम के लोग सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में स्थित भीमाशंकर असली ज्योतिर्लिंग नहीं है। अब इस मुद्दे पर सिसासत शुरू हो गई है। असम के इस दावे पर महाविकास अघाड़ी गठबंधन के नेताओं ने सवाल उठाया है। उन्होंने भाजपा पर  महाराष्ट्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को छीनने का आरोप लगाया है। इस मसले पर एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि क्या भाजपा ने महाराष्ट्र के उद्योग-धंधों को छीनने के बाद अब सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी छीनने का निर्णय लिया है। 

विज्ञापन


यहां से गरमाया विवाद
द्वादश ज्योतिर्लिंग में छठे भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को लेकर असम लंबे समय दावा करता रहा है कि असली भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग उसके यहां है। वहीं, महाराष्ट्र लगातार इसका विरोध करता रहा है। इस समय ये मुद्दा तब गरमाया जब असम सरकार ने मंगलवार को देश के अखबारों में विज्ञापन जारी कर भीमाशंकर मंदिर असम में डाकिनी पहाड़ी पर होने का दावा करते हुए महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। असम सरकार की ओर से दिए गए विज्ञापन में भीमाशंकर की कथा भी बताई गई है। विज्ञापन में देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम दिया गया है, लेकिन पुणे स्थित भीमाशंकर मंदिर की जगह असम के भीमाशंकर को छठा ज्योतिर्लिंग बताया गया है।

सुप्रिया सुले ने जताई आपत्ति
असम सरकार के विज्ञापन से गरमाए विवाद में महाविका अघाड़ी के नेता भी कूद पड़े हैं। एनसीपी से सांसद सुप्रिया सुले ने असम सरकार के दावे पर सवाल खड़े करते और भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि क्या भाजपा ने महाराष्ट्र के उद्योग-धंधों को छीनने के बाद अब सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी छीनने का निर्णय लिया है। सुले ने आगे कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने बृहद रत्नाकार स्त्रोत में भीमाशंकर का जिक्र करते हुए साफ-साफ लिखा है कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भीमा नदी और डाकिनी के जंगलों का उद्गम स्थल है। इसलिए पुणे का भीमाशंकर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। अब क्या साबित करने की जरूरत है? उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र की एकनाथ सरकार से असम सरकार को जवाब देने के लिए भी कहा है। मांग करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से हमारी मांग है कि राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासतों को बचाने के लिए इस मामले का संज्ञान लेते हुए असम के मुख्यमंत्री को इस बारे में बताएं और अपनी आपत्ति दर्ज कराएं।
विज्ञापन


इन नेताओं ने भी खड़े किए सवाल
ना केवल सुप्रिया सुले बल्कि शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता मनीषा कायंदे ने भी असम सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की तरह कभी कोई महाराष्ट्र पर भी अपना दावा जता सकता है। वहीं, मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष भाई जगताप ने कहा कि अब राम मंदिर का मुद्दा खत्म हो गया है तो भाजपा ने ज्योतिर्लिंग का नया मुद्दा सामने लाया है। 

भाजपा ने किया पलटवार
इस मामले में भाजपा नेता ने भी पलटवार किया है। भाजपा नेता और राज्य के वन और पर्यटन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पर राजनीति करने वालों पर  निशाना साधते हुए कहा कि भारत सरकार के पर्यटन विभाग ने साफ किया है कि पुणे के भीमाशंकर ही छठे ज्योतिर्लिंग हैं। इस पर कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए।

पुणे स्थित भीमाशंकर देवस्थान के पुजारी भी विरोध में  
असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा के दावे पर पुणे स्थित श्रीक्षेत्र भीमाशंकर देवस्थान के मुख्य पुजारी मधुकर शास्त्री गवांडे ने भी एतराज किया है। असम सरकार के दावे को सिरे से खारिज करते हुए मधुकर शास्त्री ने कहा कि भीमा नदी के किनारे बसा भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग अतिप्रचीन काल से है। ऐसे में असम सरकार के दावे पर किसी को भी भरोसा नहीं करना चाहिए। अपने तर्क के पीछे उन्होंने शिव पुराण और शिवलीलामृतात का भी जिक्र किया।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें