पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एफआईआर दर्ज कर ली है। यह कदम बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद उठाया गया है। अदालत ने मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था।
बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद FIR
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया था। अदालत के निर्देश के मुताबिक, सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ानी है। अब केंद्रीय एजेंसी ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। इसके साथ ही दिशा सालियान की मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच सीबीआई के स्तर पर आगे बढ़ेगी।
कैसे हुई थी दिशा सालियान की मौत?
बता दें कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम करने वाली दिशा सालियान की आठ जून 2020 को मुंबई के मालाड स्थित एक इमारत से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआत में मुंबई पुलिस ने अपनी जांच के बाद कहा था कि इसमें कोई गड़बड़ी या साजिश नहीं थी। लेकिन मौत को संदिग्ध बताते हुए दिशा के पिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और सीबीआई जांच की मांग की थी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब सीबीआई इस मामले में एफआईआर दर्ज कर नए सिरे से जांच कर रही है।
पर्याप्त सबूत मिलने तक आरोपी नहीं
अदालत ने यह साफ किया कि जब तक जांच के दौरान किसी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिल जाते तब तक किसी को भी आरोपी नहीं माना जाएगा। कोर्ट ने 44 पन्नों के फैसले में कहा कि पुलिस की जांच में बहुत सारी और साफ-साफ कमियां हैं... इस मामले में हमारा मानना है कि पुलिस के पास अपराध की जांच करने का काफी मौका था। हाईकोर्ट ने कहा कि सतीश सालियान एक युवा बेटी के बदनसीब पिता हैं। इस मामले में ठोस जांच की जरूरत थी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि वह सतीश सालियान की तरफ से कुछ लोगों पर लगाए गए आरोपों का जिक्र करने से बच रहा है। मामले की जांच करना केंद्रीय एजेंसी का काम है।
परिवार ने हत्या का लगाया था आरोप
इस मामले में दिशा सालियान के परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। परिवार का आरोप रहा है कि दिशा की मौत महज दुर्घटना या आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसमें हत्या की आशंका है। पहले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट की जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुषा देशपांडे की डिवीजन बेंच ने भी इस बात पर चिंता जताई थी कि मामले में एफआईआर दर्ज करने के बजाय केवल दुर्घटना से हुई मौत की रिपोर्ट (एडीआर) दर्ज की गई थी। कोर्ट के सामने यह भी मुद्दा उठा कि परिवार ने हत्या के आरोप लगाए थे, इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
पांच साल तक परिवार को नहीं मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि दिशा सालियान की मौत को करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी उनके परिवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और ADR की कॉपी नहीं दी गई थी। वकील निलेश ओझा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि रिपोर्ट में कई ऐसी बातें हैं, जिनसे संदेह पैदा होता है। उनका कहना था कि अगर दिशा 14वीं मंजिल से चेहरे के बल गिरी थीं, तो उनके चेहरे पर गंभीर चोटों का न होना सवाल खड़ा करता है। उन्होंने रिपोर्ट में दांतों से जुड़ी चोटों का भी जिक्र किया। हालांकि, ये आरोप और दावे जांच का विषय हैं। अब सीबीआई को मामले की जांच कर तथ्यों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना होगा।