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दिशा सालियान केस: वकील नीलेश ओझा का दावा- पेनड्राइव में छिपा है गवाह का सच; क्या सीसीटीवी ने उलझाई कहानी?

Thu, 24 Sep 2026 06:16 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, मुंबई।

सार

दिशा सालियान मौत मामले में उनके पिता के वकील नीलेश ओझा ने सीबीआई को पेनड्राइव में वीडियो, गवाहों के बयान और डिजिटल सबूत देने का दावा किया है। उन्होंने नावेद मुजावर के कथित बयान और सीसीटीवी फुटेज में समय व कपड़ों के विवरण को लेकर अंतर बताया। छह साल पुराने मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है।
 
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सामने आएगा दिशा सालियान की मौत का सच? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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दिशा सालियान की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने दावा किया है कि उनके पास एक पेनड्राइव है, जिसमें वीडियो रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयान और डिजिटल सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यह सामग्री सीबीआई को दे दी गई है और इससे दिशा की मौत से जुड़े घटनाक्रम की नई कड़ियां सामने आ सकती हैं।
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आदित्य ठाकरे समेत कई लोगों को लेकर वकील का क्या दावा?
नीलेश ओझा ने दावा किया कि पेनड्राइव में एक ऐसे प्रत्यक्षदर्शी की जानकारी है, जिसने आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया की कथित मौजूदगी और भूमिका के बारे में जानकारी दी है। वकील ने इन लोगों पर दिशा के साथ सामूहिक दुष्कर्म, हत्या और बाद में मामले को दबाने का आरोप लगाया है। 

नावेद मुजावर के बयान पर उठाए सवाल
ओझा ने नावेद मुजावर नाम के गवाह का भी जिक्र किया। उनका दावा है कि नावेद ने पहले कहा था कि उसने दिशा को ऊपर से गिरते हुए देखा था। उसके मुताबिक, वह करीब एक बजे पुलिस को बुलाने गया और करीब 1:15 बजे पुलिस के साथ वापस लौटा। वकील का कहना है कि इस बयान में दिशा के कपड़ों का भी जिक्र था।
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सीसीटीवी को लेकर क्या दावा?
वकील के मुताबिक, इस बयान और सीसीटीवी फुटेज में अंतर दिखाई देता है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि सीसीटीवी में पुलिस को करीब 12:30 बजे ही घटनास्थल पर पहुंचते हुए देखा जा सकता है। वहीं, सीबीआई को दिए गए रिकॉर्डेड बयान में कथित तौर पर समय 12:30 से 12:40 बजे के बीच बताया गया। कपड़ों के विवरण में भी अंतर होने का दावा किया गया है। ओझा के मुताबिक, पहले लाल टी-शर्ट और क्रीम रंग की पैंट का जिक्र था, जबकि बाद के बयान में ग्रे नाइटगाउन की बात कही गई।

वकील ओझा ने कहा कि इन दोनों बयानों और सीसीटीवी फुटेज के बीच के अंतर की जांच जरूरी है। उन्होंने सीबीआई से नावेद मुजावर के बयान के साथ-साथ उसके कथित संबंधों की भी जांच करने की मांग की है। वकील ने नावेद को असलम शेख का सहयोगी बताया और असलम शेख की भूमिका की भी जांच की मांग की है। 

छह साल बाद फिर क्यों खुला मामला?
दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। दिशा की मौत सुशांत सिंह राजपूत की मौत से कुछ दिन पहले हुई थी। दोनों घटनाओं के बीच संबंध को लेकर उस समय से ही तरह-तरह के दावे और चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि जांच एजेंसियों के सामने इन दोनों मामलों को जोड़ने के दावों को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच हुई है।

पहले मुंबई पुलिस ने क्या कहा था?
दिशा की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच की थी। पुलिस की जांच में मौत को आत्महत्या माना गया था। बाद में दिशा के पिता सतीश सालियान ने मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से जांच की मांग की। इसी मांग को लेकर मामला बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंचा।

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हाईकोर्ट ने किन बातों पर जताई चिंता?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सितंबर में मामले की सुनवाई करते हुए कई परिस्थितियों को देखते हुए नई जांच की जरूरत बताई। अदालत के सामने पुलिस के घटनास्थल पर पहुंचने के समय, पंचनामा, कुछ रिकॉर्ड और अन्य जांच संबंधी पहलुओं को लेकर सवाल उठे। अदालत ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि इन टिप्पणियों का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि यह तय करना है कि नए सिरे से जांच की जरूरत है या नहीं।

सीबीआई को क्यों मिली जांच?
दो सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच का निर्देश दिया। अदालत ने एजेंसी को एक वरिष्ठ अधिकारी नियुक्त करने, सतीश सालियान का बयान दर्ज करने और उसके आधार पर एफआईआर दर्ज करने को कहा था। अदालत ने यह भी कहा था कि जिस व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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इसके बाद सीबीआई ने 13 सितंबर को मामले में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में आपराधिक साजिश, सामूहिक दुष्कर्म, हत्या, सबूत मिटाने और आरोपियों को बचाने के लिए गलत सूचना देने जैसी धाराएं शामिल की गई हैं। हालांकि एफआईआर में जिन लोगों के नाम शिकायत में आए हैं, उन्हें सिर्फ नाम आने के आधार पर आरोपी नहीं माना गया है।
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