दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने तीन दिन पहले एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब छह साल तक इस मामले की जांच मुंबई पुलिस के पास थी। पुलिस ने इस मामले में नियमित एफआईआर दर्ज करने के बजाय एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (एडीआर) के आधार पर जांच की थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इसी बात को लेकर मुंबई पुलिस से सवाल किए गए थे। अदालत ने शुरुआती जांच में सामने आई कई विसंगतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।
हाईकोर्ट ने उठाए थे ये सवाल
मुंबई पुलिस की जांच में दिशा की मौत को 12वीं मंजिल से गिरने का मामला माना गया था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह सवाल उठा कि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद चेहरे की एक भी हड्डी नहीं टूटने की बात को कैसे स्वीकार किया जाए। अदालत ने जांच के दूसरे पहलुओं पर भी सवाल उठाए और कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों का जवाब देने के बजाय नए सवाल खड़े कर रही है। इन्हीं परिस्थितियों में अदालत ने मामले की जांच सीबीआई से कराने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट के सामने यह भी मुद्दा उठा कि घटना के बाद पंचनामा तैयार करने में देरी क्यों हुई। अदालत के समक्ष रखे गए सीसीटीवी फुटेज को लेकर भी सवाल उठे थे। बताया गया कि फुटेज में पुलिस टीम घटना वाली रात करीब एक बजे फ्लैट पर पहुंचती दिखाई दे रही थी, लेकिन जांच रिकॉर्ड में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं था। अदालत ने जांच की इस प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
जहां गिरी दिशा, वहां खून के निशान भी नहीं मिले
जांच में मौके से जुड़े दूसरे पहलुओं को लेकर भी विसंगतियां सामने आईं। जिस जगह दिशा के गिरने की बात कही गई, वहां खून के निशान नहीं मिलने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया। इसके अलावा फॉरेंसिक जांच के लिए नमूने लेने, कपड़ों को सुरक्षित रखने और दिशा के डिजिटल उपकरणों को जब्त करने में देरी और कमियों पर भी सवाल उठे। इन सभी पहलुओं को देखते हुए हाईकोर्ट ने मामले की नए सिरे से जांच सीबीआई से कराने का आदेश दिया।
सीबीआई ने दर्ज की है एफआईआर
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने अब हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश और संबंधित अपराधों की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली समेत कई अन्य लोगों के नाम और उनकी भूमिकाओं की जांच किए जाने का उल्लेख है। हालांकि, सीबीआई की एफआईआर में फिलहाल किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। सीबीआई को इन लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका, घटना से जुड़े आरोपों तथा पहले की जांच में सामने आई कमियों की अलग-अलग स्तर पर जांच करनी है।