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घमासान: लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा, कल राज्यसभा में बहस; विपक्षी रणनीति के लिए सत्ता पक्ष ने कसी कमर

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संसद भवन - फोटो : ANI
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संसद में आज ऑपरेशन सिंदूर चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कल भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में दो-दो हाथ होना तय है। लोकसभा में आज चर्चा की शुरुआत हो गई है। मंगलवार को राज्यसभा में भी चर्चा होगी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने बड़ी सूझ-बूझ से चक्रव्यूह तैयार किया है। सत्ता पक्ष से गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष को आईना दिखाने की तैयारी की है। वह कल विपक्ष की पोल खोलेंगे और जोरदार हमले बोलेंगे।

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पहले बात आज लोकसभा में चर्चा के शुरुआत की
लोकसभा में चर्चा की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। उन्होंने कहा कि अब भारत पाकिस्तान को आतंकी हमले पर डौजियर नहीं भेजता, बल्कि कार्रवाई करता है। जड़ तक जाता है। भारत के 22 मिनट के सैन्य ऑपरेशन में 100 आतंकियों के सफाए का दावा किया। विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत गौरव गगोई ने की। गगोई ने रक्षा मंत्री पर गोलमोल जवाब देने और तथ्यों से दूरी बनाने का आरोप लगाया। तीखे सवाल पूछे और सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। गगोई ने राष्ट्रपति ट्रंप के संघर्ष विराम के दावे, आतंकियों के पहलगाम की बैसरन घाटी तक पहुंचने, सुरक्षा इंतजाम न होने, सूरक्षा में चूक समेत तमाम सवाल उठाए। टीएमसी के कल्यण बनर्जी ने प्रधानमंत्री के आकार प्रकार के घटने पर तंज कसा। सपा के राजभर ने सरकार को घेरा। हालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बड़ी सावधानी से विपक्ष को आईना दिखाने की कोशिश की। जद(यू) के राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह का अंदाज निराला था। भाजपा के अनुराग ठाकुर ने सीधे विपक्ष के नेता राहुल गांधी को ही निशाने पर ले लिया। उन्हें एलओपी बनने में अक्षम बताते हुए एलओबी (भारत के विरोध में बोलने वाला) तक बता दिया।

मंगलवार को अमित शाह खोलेंगे विपक्ष की पोल
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सदन को बताया कि वह कल विपक्ष की पोल खोलेंगे। समझा जा रहा है कि अमित शाह के बोलने के बाद शाम को प्रधानमंत्री चर्चा का जवाब दे सकते हैं। प्रधानमंत्री इस दौरान विपक्ष को आईना दिखाने से नहीं चूकेंगे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी कल चर्चा का जवाब देंगे या सरकार की तरफ से इस जिम्मेदारी को कोई और निभाएगा, लेकिन अमित शाह से सोमवार के अंदाज से साफ लग रहा था कि वह मंगलवार को विपक्ष को कई मोर्चों पर आईना दिखा सकते हैं। गृह मंत्री विपक्ष को राष्ट्रीय अस्मिता, देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वभौमिकता को लेकर भी उसके अनुरुप आचरण की नसीहत दे सकते हैं। हालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार ऑपरेशन सिंदूर के संघर्ष विराम को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच में 22 अप्रैल से 17 जून तक किसी सीधी वार्ता से साफ इनकार किया। एस. जयशंकर ने परोक्ष रूप से कहने की कोशिश की कि पाकिस्तान हार रहा था। संघर्ष विराम की पेशकस उसने की और भारत ने इसे मान लिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा कि पाकिस्तान के डीजीएमओ के कार्रवाई रोकने के अनुरोध पर भारत ने संघर्ष विराम को स्वीकार किया।
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राहुल और अखिलेश यादव मंगलवार को बढ़ा सकते हैं संसद भवन का राजनीतिक पारा
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सरकार से सवाल पूछने के लिए तैयार हैं। अखिलेश यादव का अंदाज सरल, चुटीला और बेहद सटीक होता है। अखिलेश के बाद मंगलवार को राहुल गांधी एक बार फिर अपने ‘एग्रीयंग मैन’ के अंदाज में आ सकते हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी का हमला सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर होगा। वह आपरेशन सिंदूर के संघर्ष विराम पर भी जोरदार तंज कस चुके हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता चर्चा को लेकर अभी से चौकन्ने हैं। मंगलवार सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ होने से पहले इसको लेकर खास मंत्रणा होने की संभावना है।

लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष की है खास तैयारी
मंगलवार को राज्य सभा में चर्चा की शुरुआत होगी। माना जाता है कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सरकार से सवाल राहुल गांधी की तुलना में जनता से ज्यादा कनेक्ट होते हैं। विपक्षी दलों ने राज्य सभा में सरकार को घेरने की योजना बनाई है। तृणमूल की सयानी घोष समेत अन्य नेता सरकार असहज कर सकते हैं। सपा के प्रो. राम गोपाल यादव बड़ी ही शालीतना और चुटकी लेते हुए सरकार को घेरते हैं। शिवसेना (उद्धव गुट) ने लोकसभा में सरकार को घेरा और राज्यसभा में सांसद प्रियंका चतुर्वेदी भी सरकार से जवाब मांग सकती हैं। राज्यसभा में एक स्थिति और देखने को मिलेगी। संभवत: ऐसा पहली बार होगा, जब इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के संचालन का मुख्य दारोमदार उपसभापति हरिवंश के कंधे पर रहेगा।

राजनीति और चर्चा में प्रधानमंत्री का जवाब नहीं,
पिछले 11 साल में तमाम ऐसे अवसर आए हैं। जब भी विपक्ष ने ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरा है, प्रधानमंत्री मोदी ने उसे अपने अंदाज में हकीकत का एहसास कराया है। प्रधानमंत्री ने विपक्ष और खासकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी की समझ पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस की पूर्व सरकारों और उनके नेताओं को इतिहास के संदर्भ के साथ घेरा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री  मोदी इस चर्चा में भाग ले सकते हैं और विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम, सबूत मांगने की आदत को कठघरे में खड़ा कर सकते हैं।

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