चुनाव आयोग (ईसी) ने सर्वोच्च न्यायालय में गैर सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के एक आवेदन पर हलफनामा दायर किया। एडीआर ने मतदान के 48 घंटों के भीतर लोकसभा चुनाव 2024 में डाले गए मतों की संख्या सहित सभी मतदान केंद्रों में मतदाता मतदान के अंतिम प्रमाणित आंकड़ों का खुलासा करने की मांग की थी। आयोग ने एडीआर के हलफनामे को खारिज करने की मांग की और कहा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्व कामकाज को बदनाम करने के लिए उस पर झूठे आरोप लगाते रहते हैं।
पिछले हफ्ते शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग से उस आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा था, जिसमें हालिया लोकसभा चुनाव के प्रत्येक चरण के मतदान की समाप्ति के बाद सभी मतदान केंद्रों पर दर्ज मतों का तुरंत आंकड़ा अपलोड करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। एडीआर ने आरोप लगाया कि चुनाव के पहले दो चरणों के मतदान प्रतिशत के आंकड़ों के प्रकाशन में अत्यधिक देरी हुई। आवेदन में मतदाता मतदान विवरण प्रकाशित करने में देरी के अलावा कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रारंभिक मतदान प्रतिशत के आंकड़ों में वृद्धि हुई है।
आवेदन में आयोग को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया है कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों के प्रत्येक चरण के मतदान के बाद फॉर्म17सी भाग-1 में दर्ज किए गए मतों की संख्या के पूर्ण आंकड़ों में सारणीबद्ध मतदान केंद्र-वार डाटा प्रदान करे। साथ ही चल रहे लोकसभा चुनावों में पूर्ण संख्या में मतदान के निर्वाचन क्षेत्रवावार आंकड़ों का एक सारणीकरण भी करे।
आवेदन में कहा गया है कि आम चुनाव के पहले दो चरणों के मतदान के आंकड़े 19 अप्रैलो को पहले चरण के मतदान के 11 दिन बाद और 26 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के चार दिन बाद 30 अप्रैल को प्रकाशित किए गए थे। इस पर आयोग ने कहा कि 30 अप्रैल की प्रेस विज्ञप्ति में उसकी ओर से प्रकाशित आंकड़ों में मतदान के दिन घोषित प्रारंभिक मतदान प्रतिशत में तेज वृद्धि (करीब 5-6 फीसदी) दिखाई दी।