भारत के जी-20 शेरपा अमिताभ कांत और आईएएस अधिकारी स्मिता सभरवाल द्वारा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में दिव्यांग कोटा का 'दुरुपयोग और समीझा' पर की गई टिप्पणी के बाद बहस शुरू हो गई है। दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं ने आईएएस अधिकारियों की टिप्पणियों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों को 'संकीर्ण दृष्टिकोण' से नहीं देखा जाना चाहिए, जिससे उनकी योग्यता पर सवाल खड़े हों। कुछ कार्यकर्ताओं ने अपना पक्ष रखने के लिए शीर्ष चिकित्सकों, सेना के जवानों और व्यापारियों का उदाहरण दिया।
यह विवाद प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर के खिलाफ कदाचार के आरोपों के बीच शुरू हुआ है। उन पर यूपीएससी की परीक्षा में अपनी उम्मीदवारी सुरक्षित करने के लिए विकलांगता और अन्य पिछड़ा वर्ग (नॉन-क्रीमी लेयर) कोटे का दुरुपयोग करने का आरोप है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने खेडकर के खिलाफ कथित रूप से फर्जी पहचान बताकर सिविल सेवा परीक्षा में अनुमत प्रयासों से अधिक प्रयास करने के आरोप में मामला दर्ज कराया है।
आईएएस अधिकारी अमिताभ कांत ने यूपीएससी में विकलांगता आरक्षण से संबंधित कथित धोखाधड़ी गतिविधियों पर चिंता जाहिर की और कोटा की समीक्षा का सुझाव दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, 'ऐसे सभी मामलों की पूरी जांच होनी चाहिए और सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। योग्यता और ईमानदारी के आधार पर चयन से कभी समझौता नहीं किया जाना चाहिए।'
आईएएस अधिकारी सभरवाल की टिप्पणी ने बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने एक पोस्ट में कहा, 'जैसा कि यह बहस तेज हो रही है- दिव्यांगों के प्रति पूरे सम्मान के साथ, मैं पूछ रही हूं कि इस प्रमुख सेवा को इस कोटा की आवश्यकता क्यों है। क्या कोई एयरलाइन दिव्यांग पायलट को नियुक्त करती है? या क्या आप दिव्यांग सर्जन पर भरोसा करेंगे? एआईएस, (आईएएस/आईपीएस/आईएफओएस) की प्रकृति फील्ड-वर्क, लंबे समय तक कर लगाना, लोगों की शिकायतों को सीधे सुनना है, जिसके लिए शारीरिक फिटनेस की आवश्यकता होती है।
सभरवाल को जवाब देते हुए, विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता डॉ. सतेंद्र सिंह ने कहा, 'हां, भारत में भी कई विकलांग सर्जन हैं। यूरोलॉजी, गैस्ट्रो सर्जरी और प्लास्टिक सर्जरी जैसे क्षेत्रों में। इसलिए, जब आप अगली बार विकलांग व्यक्ति को देखें तो योग्यता का अनुमान लगाएं'