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चंदन ने किए कई बड़े खुलासे, दिल्ली में तैयार हुई थी रामवृक्ष की डर्टी कंपनी

Fri, 17 Jun 2016 04:28 AM IST
पुनीत शर्मा/अमर उजाला, मथुरा
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रामवृक्ष की डर्टी कंपनी दिल्ली में तैयार हुई थी। - फोटो : अमर उजाला
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जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष की डर्टी कंपनी दिल्ली में तैयार हुई थी। दरअसल रामवृक्ष, चंदनबोस, राकेश गुप्ता और वीरेश बाबा जयगुरुदेव के लुधियाना में हुए सत्संग से वापस लौट रहे थे। एक रात के लिए यह लोग दिल्ली में रुके। यहां रामवृक्ष ने कहा था कि वह बाबा जयगुरुदेव का उत्तराधिकारी है और सारी व्यवस्थाएं देखता है। बस यहीं इन चारों का गठजोड़ बन गया।
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गाजीपुर जनपद के गांव रामपुर बांगसुर निवासी रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य था। प्रदेश और प्रदेश से बाहर जहां भी बाबा जयगुरुदेव की संगत होती थी वह वहां जाता था। चंदनबोस भी जयगुरुदेव से जुड़ा हुआ था। बदायूं का राकेश गुप्ता और वीरेश भी बाबा के अनुयायी थे। 2010 से ही यह लोग रामवृक्ष के संपर्क में आए। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया कि जब बाबा जयगुरुदेव का निधन हुआ तो रामवृक्ष ने खुद को उनका उत्तराधिकारी साबित करने के लिए जद्दोजहद शुरू कर दी थी। उस वक्त भी यह तीनों रामवृक्ष के साथ थे।

शिवपूजन पटेल ने लगा रखी थी बड़ी रकम
सिद्धार्थ नगर निवासी शिवपूजन पटेल नाम का शख्स रामवृक्ष का सबसे बड़ा मददगार बताया जा रहा है। चंदनबोस ने जो पूछताछ में पुलिस को बताया है उसके मुताबिक चीनी, दाल, मसाले और नमक की व्यवस्था उसने ही कराई थी। शिवपूजन ने ही कहा था कि वह लोग जवाहर बाग में बाजार लगाकर सस्ती चीनी, दाल, फल, मसाले और सब्जी बेचें। इससे मथुरा वालों के दिलों में जगह बना सकेंगे। इससे लोग उनका विरोध करना बंद कर देंगे।
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कई दफा बने जयगुरुदेव आश्रम पर हमले के प्लान
चंदनबोस ने पुलिस को बताया कि रामवृक्ष किसी भी हाल में बाबा जयगुरुदेव के आश्रम पर काबिज होना चाहता था। इसके लिए कई दफा प्रयास किया। लोगों को इकट्ठा करके आश्रम पर हमला करने तक की योजना थी।

कई जगह जमीनों पर कब्जे की थी तैयारी
बस्ती से गिरफ्तार किए गए रामवृक्ष के करीबी चंदनबोस ने जो पुलिस को बताया है वह वाकई चौंकाने वाला है। चंदनबोस के अनुसार रामवृक्ष अपने संगठन को विस्तार देकर प्रदेश में कई जगह सरकारी भूमि या बाग पर कब्जा करने की तैयारी में था। इसके लिए कोशिश भी शुरू हो गई थी। चंदनबोस का कहना है कि बरेली के लखीमपुर में तो आज भी लोग जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। कुछ बड़े आश्रमों पर भी उसकी निगाह थी। 

एनसीआर में ढूंढ रहे थे ठिकाना
रामवृक्ष और उसके लोग दिल्ली और आसपास के जिलों में भी ठिकाना ढूंढ रहे थे। उनका मकसद था कि अगर आसपास कोई भूमि कब्जा ली जाएगी तो वह लोग राजधानी में अपनी जगह बना सकेंगे। यहां से दूसरे राज्यों में भी संगठन को खड़ा किया जा सकेगा।

चंदनबोस और उसकी पत्नी को जेल भेजा

पुलिस ने चंदन की पत्नी का चिकित्सकीय परीक्षण करवाकर जेल भेज दिया। - फोटो : अमर उजाला
जवाहर बाग हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव के दाहिने हाथ चंदनबोस और उसकी पत्नी पूनम को गुरुवार सुबह बस्ती से कड़ी सुरक्षा में मथुरा लाया गया। यहां एसएसपी सहित चार पुलिस अधिकारियों और क्राइम बांच की टीम ने उनसे चार घंटे से भी अधिक समय तक पूछताछ की। इसके बाद दोनों का मेडिकल कराकर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

चंदनबोस और उसकी पत्नी को पुलिस ने फिलहाल चार पुराने मामलों में न्यायालय में पेश किया। इनमें वह पहले से ही वांछित चल रहा था। एक मामला 22 जनवरी, 2014 की रात में जवाहर बाग के सामने गेट बनाने के दौरान तत्कालीन एसओ सदर प्रदीप पांडेय, तत्कालीन कोतवाली प्रभारी कुंवर सिंह यादव, तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट हेम सिंह यादव सहित पांच अधिकारियों को मारपीट कर घायल करने का है। तीन अन्य मामलों में चार अप्रैल को मथुरा तहसील में वकीलों-वादकारियों पर हमला करने, आलू खोदने गए जवाहर बाग के कर्मचारियों को मारपीट कर बंधक बनाने और पेड़ काटने से रोकने पर कर्मचारियों से मारपीट करने के मामले हैं।

बताया जा रहा है कि दो जून को आपरेशन जवाहर बाग के दौरान पेड़ से कूदने पर चंदनबोस की पैर की हड्डी टूट गई थी। उसके चार साथी और पत्नी पूनम उसे जवाहर बाग से निकाल ले गए थे। उसे बस्ती पुलिस ने मंगलवार की देर रात उसकी ससुराल से पत्नी सहित गिरफ्तार कर लिया था। चंदनबोस और उसकी पत्नी को कड़ी सुरक्षा में क्राइम ब्रांच की टीम मथुरा लेकर आई।

गुरुवार सुबह एसएसपी बबलू कुमार, एसपी सिटी आलोक प्रियदर्शी, एसपी ट्रैफिक आशुतोष द्विवेदी, एसपी क्राइम राजेश सोनकर, एसपी ग्रामीण अरुण कुमार सिंह ने दोनों पूछताछ की। दोपहर एक बजे दोनों का फिर से मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद सीजेएम की कोर्ट और एसीजेएम प्रथम की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

जवाहर बाग में दो जून को थे ढाई हजार लोग
चंदनबोस ने गुरुवार को पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि दो जून को जवाहर बाग में ढाई हजार लोगों की भीड़ थी। अभी तक पुलिस और खुफिया एजेंसियां दावा करती रही हैं कि तब जवाहर बाग में एक हजार लोग थे। जवाहर बाग में यूपी, झारखंड और बिहार तक के लोग रहे थे। इनके रहने के लिए बाकायदा तंबुओं की पूरी कालोनी बन गई थी।

महिलाएं भी बड़ी संख्या में थीं। दो जून को आपरेशन जवाहर बाग के समय भी यहां ढाई हजार लोग थे। पुलिस पूछताछ में चंदनबोस ने बताया कि ढाई हजार लोगों की संख्या इसलिए उसे याद है क्योंकि दो जून की सुबह सभी की हाजिरी ली गई थी। जब उससे वहां होने वाली मौतों के बारे में पूछा गया तो उसका कहना था कि वह तो शुरुआत में ही भाग गया था।
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400 लोग ले चुके थे ‘नक्सल’ ट्रेनिंग

जवाहर बाग में 400 से अधिक नौजवानों को नक्सलियों के समान हथियारों की ट्रेनिंग दी जा चुकी थी। रामवृक्ष और उसके दस ट्रेनर उनको मानसिक और शारीरिक रूप से लड़ाई के लिए तैयार कर रहे थे। बच्चों को भी लाठी-डंडे चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। गुरुवार को मीडिया से मुखातिब एसएसपी बबलू कुमार ने चंदनबोस से पूछताछ में सामने आए कुछ तथ्यों से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि पूछताछ में सामने आया है कि रामवृक्ष यादव ने एक कमेटी बना रखी थी। इसमें रामवृक्ष यादव खुद अध्यक्ष था, चंदनबोस उपाध्यक्ष, राकेश गुप्ता सचिव, हरनाथ सिंह और वीरेश यादव प्रमुख सदस्य थे। इनको ही खरीदारी, साफ-सफाई और अन्य जिम्मेदारियां दी गई थीं।

उन्होंने बताया कि चंदनबोस से पूछताछ में कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि बदायूं निवासी वीरेश यादव कब्जाधारियों को लाठी-डंडा, तमंचा चलाने और बम बनाने की ट्रेनिंग देता था। बच्चों को भी लाठी-डंडा चलाना सिखाया जाता।

रामवृक्ष जेल में बंद लोगों की जमानत कराने, अधिवक्ताओं से मिलने, तारीख पर जाने, जमानतियों का इंतजाम करने का कार्य करता था। वह अपने संपर्क में आए लोगों को आजाद हिंद सरकार से जोड़ने का काम भी करता था। राकेश गुप्ता और हरनाथ सिंह पर आर्थिक मददगारों से जुड़े रहने की जिम्मेदारी थी। नए-नए तरीकों से दान और चंदा जुटाया जाता। लोगों को बाबा जयगुरुदेव के नाम पर भी दान और चंदे के लिए तैयार किया जाता था।

राकेश गुप्ता लाया था हथियार
बदायूं के राकेश गुप्ता ने रामवृक्ष के संगठन को 10 लाख रुपये दिए थे। बदायूं में अपनी संपत्ति को भी आजाद हिंद सरकार के लिए दे दिया था। ये संपत्ति करोड़ों रुपये की बताई जाती है। वह अपने संपर्क में आए लोगों को रामवृक्ष को जोड़ने का कार्य भी करता था। उनसे चंदा वसूली और बाबा जयगुरुदेव के नाम पर दान राशि लेता। वह जब जवाहर बाग में आया तो अपने साथ लाइसेंसी राइफल और कुछ अन्य हथियार भी लाया। पुलिस से तनाव बढ़ने पर वो अपनी इनोवा गाड़ी में करीब सौ हथियारों की खेप भी लेकर आया था।

आर्थिक मददगारों की बनाई जा रही कुंडली
चंदनबोस ने रामवृक्ष को हर माह आर्थिक मदद करने वालों के नाम भी पुलिस को बताए हैं। ऐसे दस प्रमुख मददगार मिले हैं। इन लोगों ने 10 लाख से अधिक की राशि की मदद आजाद हिंद सरकार को की थी। पुलिस ने जवाहर बाग से मिले रजिस्टर के नामों की भी चंदनबोस से पुष्टि कराई है।

राकेश, वीरेश की तलाश में चार टीमें दे रहीं दबिश
जवाहर बाग में दो जून को हुई हिंसा के बाद फरार बदायूं के राकेश गुप्ता और वीरेश यादव की गिरफ्तारी के लिए मथुरा पुलिस की चार विशेष टीम दबिश दे रही हैं। इन टीमों ने एसटीएफ और एटीएस के साथ भी कोआर्डिनेशन किया हुआ है। एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि जवाहर बाग में जो वाहन जले हैं उनके चेसिस और इंजन नंबर से असली मालिकों का पता लगाया जा रहा है।

50 से अधिक लोगों ने पेड़ों से चलाईं थी गोलियां
चंदनबोस ने पूछताछ में खुलासा किया है कि आपरेशन जवाहर बाग के दिन रामवृक्ष के कहने पर जगह-जगह लोगों की टोली बना दी गई थी। 50 से अधिक लोग वृक्षों पर तमंचे और अन्य हथियार लेकर चढ़ गए थे। पुलिस के जवाहर बाग में घुसने पर पहले पथराव और लाठी-डंडों से हमला किया गया। बाद में चारों ओर से गोलियां चलाई गईं। वीरेश यादव, हरनाथ सिंह सहित 10 लोग टोलियों का नेतृत्व कर रहे थे।

गिरफ्तार लोगों का हो रहा सत्यापन 
जवाहर बाग में पकड़े गए 267 लोगों की पुलिस की ओर से सत्यापन कराया जा रहा है। जेल में बंद कब्जाधारियों के बताए नाम और पते की संबंधित जनपदों से सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है।

रिटायर फौजी भी रामवृक्ष की टीम में
मथुरा। जवाहर बाग में पुलिस को तलाशी में एक सैनिक का कार्ड भी मिला था। चंदनबोस से इस बारे में पूछताछ की तो उसने बताया कि एक रिटायर्ड फौजी भी आजाद सिंह सरकार में सदस्य था। वह भी हथियार चलाने से लेकर अन्य गतिविधियों में शामिल रहता था।
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