सुप्रीम कोर्ट ने कहा है घटिया उत्पाद से संबंधित मामले में कंपनी केमुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ), निदेशक या प्रमोटर को तब तक तलब नहीं किया जा सकता जब तक उन पर सीधे तौर पर आरोप न हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह व्यवस्था दी है। शीर्ष अदालत का यह आदेश इस मायने में अहम हैं कि किसी कंपनी की खराब या घटिया उत्पाद के मामले में आमतौर पर निचली अदालत कंपनी के उच्च अधिकारियों को तलब कर लेती है।
न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि खराब उत्पाद केलिए अगर कंपनी केनिदेशक या अन्य पर सीधे तौर पर आरोप न हो, उन्हें तलब नहीं किया जा सकता है। जब आरोप सिर्फ कंपनी पर हो तो कंपनी की ओर से नामित कोई व्यक्ति प्रतिनिधित्व कर सकता है।
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पीठ ने प्रीवेंशन ऑफ फूड अडल्ट्रेशन एक्ट, 1954 की धारा-17(4) की व्याख्या करते हुए कहा है कि कंपनी के सीईओ, निदेशक या प्रमोटर को व्यक्तिगत जवाबदेही के लिए तब समन किया जा सकता जब ट्रायल कोर्ट में बयान दर्ज होने की कार्रवाई शुरू हो गई हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश औरंगाबाद की एक अदालत द्वारा दूध एवं दूध उत्पाद बनाने वाली एक निजी कंपनी के निदेशकों को तलब करने केआदेश को निरस्त करते हुए दिया है।