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कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए देश को चाहिए करोड़ों स्वास्थ्य सैनिकः डॉ. दिनेश बत्रा

Wed, 20 May 2020 01:00 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • उजाला सिग्नस हॉस्पीटल (Ujala Cygnus Hospital) के निदेशकों से अमर उजाला डॉट कॉम (www.amarujala.com) की विशेष बातचीत
  • विशेषज्ञों ने कहा- देश की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में भारी निवेश से ही ऐसे हालातों से निबट सकता है देश
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Dr. Dinesh Batra, Director, Ujala Cygnus Hospital - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उजाला सिग्नस हॉस्पिटल के निदेशक डॉक्टर दिनेश बत्रा ने कहा कि कोरोना जैसी किसी भी महामारी से निबटने के लिए देश को करोड़ों स्वास्थ्य सैनिकों की आवश्यकता है। इसके लिए एनसीसी और एनएसएस की तर्ज पर युवाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
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इससे कोरोना जैसी किसी भी महामारी के समय हमारे देश में करोड़ों स्वास्थ्य सैनिक उपलब्ध होंगे और ऐसे में कोरोना जैसी स्थिति से बेहतर ढंग से निबटा जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि इसके लिए एमबीबीएस और एमडी जैसे मेडिकल कोर्स करके निकल रहे डॉक्टरों को एक से तीन साल के लिए गांवों में नियुक्त करना और शिक्षा पाठ्यक्रमों में ही स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर जानकारी देना अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
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अमर उजाला डॉट कॉम से मंगलवार को विशेष बातचीत करते हुए डॉक्टर दिनेश बत्रा ने कहा कि हमें एक लाख की संख्या को देखकर भयभीत नहीं होना चाहिए। मुंबई की स्थिति को देखते हुए अपनी स्थिति का आकलन न करें।

बल्कि इसके लिए आप अपने आसपास नजर डालें और उसके हिसाब से अपनी दिनचर्या और कामकाज में परिवर्तन लाएं। किसी भी दूसरी जगह का मॉडल आपके क्षेत्र में कारगर साबित नहीं हो सकता है।

डॉक्टर बत्रा ने कहा कि कोरोना वैक्सीन को विकसित करने के प्रयास चल रहे हैं और उम्मीद है कि दिसंबर या जनवरी माह तक कोरोना की वैक्सीन सामने आ सकती है। हालांकि इसके लिए मनुष्यों पर दूसरे और तीसरे स्टेज का ट्रायल होना बाकी है।

उन्होंने कहा कि सैनिक युद्ध जैसी स्थिति में सेवा करने के लिए प्रशिक्षित होते हैं, लेकिन यह पहली बार हुआ है कि जब डॉक्टर भी ऐसी परिस्थिति में काम कर रहे हैं जहां उनकी जान जाने को खतरा है। ऐसी स्थिति में काम करने के लिए विशेष मानसिक स्थिति की आवश्यकता होती है और डॉक्टर ऐसी परिस्थिति में बेहतर ढंग से काम करना सीख रहे हैं।

प्राथमिक हेल्थ सेंटर्स पर निवेश की सबसे ज्यादा जरूरत

उजाला सिग्नस के एक अन्य निदेशक डॉक्टर सचिन बजाज ने कहा कि हमारी व्यवस्था बीमारों का इलाज करने के सिस्टम पर काम करने की है, जबकि हमारी कोशिश लोगों को बीमार होने से पहले ही स्वस्थ रखने की होनी चाहिए।

इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन दुर्भाग्य से हमारे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत सबसे खराब है। इलाज की 70 फीसदी से अधिक व्यवस्था प्राइवेट संस्थाओं पर निर्भर करती है।

जबकि हमारे देश में आजादी के समय सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की भूमिका 70 फीसदी से अधिक होती थी। इस स्थिति को दुबारा लाया जाना चाहिए। इंडियन मेडिको सर्विसेज को दुबारा स्थापित किया जाना चाहिए।

SMS अपनाकर कोरोना से बचें

कोरोना से बचाव के लिए डॉक्टर सचिन बजाज ने कहा कि लोगों को कोरोना से बचने के लिए SMS को अपनाना चाहिए।

S का अर्थ है कि आप हाथ सैनिटाइज करते रहें, नहाते रहें और अपने कपड़ों को साफ-सुथरा रखें। साफ भोजन करें, व्यायाम करें और पर्याप्त आराम करें।

M का अर्थ है कि बिना मास्क पहने घर से न नकलें और S का अर्थ है कि सोशल डिस्टेंसिंग को हमेशा बनाए रखें। बिना आवश्यकता के घर से बाहर न निकलें।

उजाला सिग्नस ने कोरोना काल में किया ये काम

डॉक्टर दिनेश बत्रा ने बताया कि उजाला सिग्नस हॉस्पिटल (UJALA CYGNUS HOSPITAL) कोरोना काल में लोगों की बेहतरीन सेवा कर रहा है। उजाला-सिग्नस हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 12 अस्पताल चला रहा है।

दक्षिणी दिल्ली का उजाला सिग्नस का एक पूरा अस्पताल कोरोना की लड़ाई में सरकार को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अलावा लोगों टेलीफोन पर ही मुफ्त सलाह दी जा रही है।

कई मरीज जो बीमारी का खर्च नहीं उठा सकते, अस्पताल उनको मुफ्त इलाज की सुविधा दे रहा है। हरियाणा में एक स्कूल के साथ मिलकर गरीब लोगों को मुफ्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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