मुंबई में आतंकी हमले के साजिशकर्ता तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को बलिदानी एनएसजी कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता के. उन्नीकृष्णन ने राजनयिक सफलता बताया है। वहीं अपने बेटे को हमले के पीड़ित कहे जाने पर उन्होंने कहा कि वो उस समय अपना कर्तव्य निभा रहा था।
मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए बलिदान हुए राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडो मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के पिता के. उन्नीकृष्णन ने कहा कि मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की 'कूटनीतिक सफलता' है। मेजर के पिता ने कहा, 'अमेरिका की सहमति के बाद उसे वापस लाने की बात चल रही थी, वह केवल एक कड़ी है। यह कूटनीतिक सफलता है जो भारत को लंबे समय के बाद मिली है। यह कोई अंतिम बात या बड़ी उपलब्धि नहीं है; इसमें बहुत सी परतें हैं जिन्हें हमें हासिल करना है। एक आम आदमी के लिए, वह एक कड़ी था। जब डेविड कोलमैन हेडली भारत में था, तब उसने 231 कॉल किए थे। सारे सबूत यहां मौजूद हैं। यह (राणा) एक विद्वान व्यक्ति है जो अकेले ही सब कुछ संभाल सकता है। देखते हैं इससे क्या निकलता है।'
'संदीप पीड़ित नहीं, वो अपना कर्तव्य निभा रहा था'
वहीं उन्होंने आगे कहा कि संदीप 26/11 का पीड़ित नहीं था; वह एक सुरक्षाकर्मी था जो हमले के दौरान ड्यूटी पर था। वह भारतीय लोगों का मुश्किल वक्त में हाथ था। असली पीड़ित वे लोग हैं जिन्होंने पीड़ित हुए। हमले में किसने अपनी जान गंवाई? वह पीड़ित नहीं था क्योंकि उसने अपना कर्तव्य निभाया। उन्होंने कहा, अगर उसने मुंबई में ऐसा नहीं किया होता, तो वह कहीं और करता। वह अपना कर्तव्य निभा रहा था।
तहव्वुर राणा को फांसी देने की मांग
26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मामले में अपनी गवाही के दौरान आतंकवादी अजमल कसाब की पहचान करने वाली एक प्रमुख गवाह और आतंकवाद पीड़ित देविका नटवरलाल रोटावन ने तहुव्वर राणा के लिए मौत की सजा की मांग की है। उन्होंने कहा, 'तहव्वुर राणा को भारत लाया जाना भारत सरकार के लिए एक बड़ी जीत है। हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तान में मौजूद अन्य आतंकवादी मास्टरमाइंड को भी भारत लाया जाना चाहिए और उन्हें मौत तक फांसी पर लटका देना चाहिए।'