पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी
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पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी एक बार फिर चर्चा में हैं। पूर्व रेल मंत्री के रूप में बड़ा फैसला लेने वाले त्रिवेदी अब नई और अहम जिम्मेदारी की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। साल 2011-12 में रेल किराया बढ़ाने का उनका फैसला सुधार के रूप में देखा गया था, लेकिन इसी निर्णय के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा था।
अब उन्हें बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त बनाए जाने की खबरें हैं। यह नियुक्ति सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति, भारत-बांग्लादेश संबंध और केंद्र सरकार की रणनीति के बीच त्रिवेदी की भूमिका एक बार फिर महत्वपूर्ण होती दिख रही है।
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते इस समय संवेदनशील दौर में हैं। ऐसे में अनुभवी और राजनीतिक समझ रखने वाले नेता को इस पद पर भेजना एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। त्रिवेदी का पश्चिम बंगाल से गहरा जुड़ाव है। जो बांग्लादेश के साथ सांस्कृतिक और भौगोलिक समझ में मदद कर सकता है। इसलिए उनकी संभावित नियुक्ति को कूटनीतिक और राजनीतिक दोनों नजरिए से अहम माना जा रहा है।
त्रिवेदी का जन्म 4 जून 1950 को नई दिल्ली में हुआ। उन्होंने कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और बाद में विदेश में प्रबंधन की शिक्षा ली। राजनीति में आने से पहले वे पायलट रहे और व्यवसाय भी संभाला। जिससे उनकी पृष्ठभूमि काफी विविध रही।
उनका राजनीतिक करियर कांग्रेस से शुरू हुआ, इसके बाद वे जनता दल से जुड़े और 1990 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे। बाद में में शामिल होकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हुए। 2009 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे और केंद्र सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
त्रिवेदी को 2011 में यूपीए सरकार ने रेल मंत्री बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने रेलवे को आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं थी।2012 के रेल बजट में उन्होंने यात्री किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिसे आर्थिक सुधार के तौर पर जरूरी माना गया। हालांकि यह फैसला राजनीतिक रूप से भारी पड़ा और तृणमूल कांग्रेस के विरोध के बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। यह घटना उनके राजनीतिक करियर का सबसे चर्चित मोड़ मानी जाती है।