Digital Piracy: केंद्र सरकार ने डिजिटल पायरेसी को रोकने के लिए कानून में बदलाव किया है। अब फिल्मों की अवैध रिकॉर्डिंग और प्रसारण करने वालों को तीन साल तक जेल और निर्माण लागत के पांच प्रतिशत तक का भारी जुर्माना हो सकता है। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री ने बताया कि ये सजा पहले तीन महीने जेल और तीन लाख रुपये जुर्माने से बढ़ाकर कड़ी कर दी गई है।
डिजिटल ‘पायरेसी’ पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कानूनों में संशोधन करके फिल्मों की अवैध रिकॉर्डिंग और प्रसारण में शामिल लोगों के लिए तीन साल तक की कैद और निर्माण लागत के पांच प्रतिशत तक के कठोर जुर्माने का प्रावधान किया है। पायरेसी का आशय सॉफ्टवेयर, संगीत, फिल्मों और पुस्तकों जैसी कॉपीराइट सामग्री का अवैध तरीके से पुनरुत्पादन (री-प्रोडक्शन), वितरण या उपयोग से है।
सरकार ने फिल्म ‘पायरेसी’ के खिलाफ प्रावधानों को मजबूत करने के लिए दो साल पहले सिनेमैटोग्राफ अधिनियम में ये बदलाव किए थे। सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने पिछले हफ्ते संसद को बताया, ‘इन संशोधनों में न्यूनतम तीन महीने की कैद और तीन लाख रुपये के जुर्माने की सख्त सजा शामिल है, जिसे तीन साल की कैद और ऑडिट की गई सकल निर्माण लागत के पांच प्रतिशत तक के जुर्माने तक बढ़ाया जा सकता है।’
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उन्होंने कहा कि सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6एए और 6एबी बिना अनुमति के फिल्म की रिकॉर्डिंग और प्रसारण पर रोक लगाती हैं। नई जोड़ी गई धारा 7(1बी)(2) सरकार को यह अधिकार देती है कि वह मध्यस्थ को निर्देश दे सके कि वे पाइरेसी कंटेंट होस्ट न करें।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को कॉपीराइट धारकों या अधिकृत व्यक्तियों से शिकायतें प्राप्त करने और ऐसे कंटेंट होस्ट करने वाले मध्यस्थों को आवश्यक निर्देश देने का अधिकार दिया गया है। एक अंतर-मंत्रालयी समिति भी गठित की गई है, जो पायरेसी के खिलाफ रणनीतियों को मजबूत करेगी और समन्वित कार्य योजना बनाएगी।
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मनोरंजन उद्योग को 2023 में मुख्य रूप से पायरेसी के कारण 22,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।