भारत के 21 प्रमुख डिजिटल समाचार प्रकाशकों के संगठन डीएनपीए ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। संगठन का कहना है कि कानून में पत्रकारिता को छूट नहीं मिलने से खोजी पत्रकारिता और गोपनीय सूत्रों की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। कानून के कई कड़े प्रावधान मई 2027 से लागू होने हैं।
भारत के 21 प्रमुख डिजिटल समाचार प्रकाशकों के संगठन डीएनपीए (डिजिटल न्यूज पल्बिशर्स एसोसिएशन) ने सरकार के नए 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून' को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि दुनिया के अन्य विकसित देशों जैसे यूरोपीय संघ (ईयू), ब्रिटेन और सिंगापुर में जब इस तरह के डेटा प्राइवेसी कानून बनाए गए, तो उनमें पत्रकारिता को स्पष्ट रूप से छूट दी गई, लेकिन भारत के कानून में मीडिया जगत को ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है। इस कानून के कई कड़े प्रावधान मई 2027 से लागू होने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट में आज इस मामले पर सुनवाई होगी।
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खोजी पत्रकारिता पर संकट
मीडिया संगठन का कहना है कि नए कानून के तहत किसी भी व्यक्ति की निजी जानकारी या डेटा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी लिखित सहमति लेना अनिवार्य है। यदि वे किसी बड़े घोटाले या भ्रष्टाचार की खोजी रिपोर्टिंग कर रहे हैं, तो वे आरोपी व्यक्ति से सहमति कैसे मांग सकते हैं? इससे खोजी पत्रकारिता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
सूत्रों की गोपनीयता का खतरा
कानून के तहत सरकार के पास किसी भी संस्था से डेटा या जानकारी मांगने के व्यापक अधिकार हैं। मीडिया घरानों को डर है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल कर सरकार पत्रकारों से उनके गोपनीय सूत्रों और आंतरिक दस्तावेजों की पहचान उजागर करने के लिए कह सकती है।