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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा, डिजिटल मीडिया फैला रहा है जहरीली नफरत और हिंसा

Tue, 22 Sep 2020 02:01 AM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा है कि डिजिटल मीडिया जहरीली नफरत और हिंसा फैला रहा है। यह पूरी तरह से अनियंत्रित है और लोगों की प्रतिष्ठा को धूमिल कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर सरकार ने कहा, डिजिटल मीडिया विनियमन (रेगुलेशन) भी एक ऐसा विषय है, जिस पर विधायिका को परीक्षण करना चाहिए। सिविल सेवा में मुस्लिम समुदाय की घुसपैठ से संबंधित एक न्यूज चैनल के विवादास्पद कार्यक्रम ‘यूपीएससी जेहाद’ से संबंधित मामले में दिए गए जवाब में सरकार ने कहा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए विनियमन की जरूरत नहीं है। अगर फिर भी अदालत को लगता है कि इनमें विनियमन की जरूरत है तो वह इसकी शुरुआत डिजिटल मीडिया से करें। अगली सुनवाई बुधवार को होगी।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ के समक्ष सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से दाखिल इस हलफनामे में कहा गया है कि शीर्ष अदालत को या तो प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए नए दिशा-निर्देश बनाने की जिम्मेदारी विधायिका या सक्षम अथॉरिटी पर छोड़ देना चाहिए या उसे पहले डिजिटल मीडिया को नियंत्रित करने की कवायद करनी चाहिए। हलफनामे के मुताबिक, अगर ब्रॉडकास्टर व प्रकाशकों को ऐसा लगता है कि किसी सामग्री को लेकर उसे निशाना बनाया जा सकता है तो वह उस सामग्री को प्रकाशित करने के लिए डिजिटल मीडिया का सहारा लेता है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में सरकार से पूछा था कि चैनलों के स्व विनियमन के नियम को और कैसे मजबूत किया जा सकता है।

29 करोड़ में से एक करोड़ का चंदा विदेश से मिला: जकात फाउंडेशन
जकात फाउंडेशन का कहना है कि उसे 29 करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जिनमें से एक करोड़ रुपये विदेश से मिला था। जिन अभ्यर्थियों को जकात फाउंडेशन ने वित्तीय मदद की है, उनमें सिर्फ एक समुदाय के लोग नहीं है, बल्कि अन्य समुदाय के लोग भी हैं।
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दुर्लभ शक्ति का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, उसे किसी टीवी चैनल के लिए प्रोग्राम कोड का समर्थक नहीं बनना है, बल्कि उसे संविधान में निहित मानवीय गरिमा, स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करना है। पीठ ने कहा कि यह एक दुर्लभ सांविधानिक शक्ति है, जिसे ज्यादा सावधानी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हमारे अधिकार क्षेत्र का वहां इस्तेमाल नहीं होता जब वैकल्पिक नागरिक और व्यक्तिगत उपाय मौजूद हो।

क्या आज कोई ऐसा कार्यक्रम है जो आक्रामक न हो: जस्टिस जोसेफ
जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि क्या आज के दिन कोई ऐसा प्रोग्राम है जो आक्रामक न हो। हमारे देश में इस संबंध में विधान है, जिसके तहत सरकार इन मामलों में दखल दे सकती है। जस्टिस जोसेफ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा, क्या सरकार इस तरह के कार्यक्रमों को देखती है और क्या वह यह देखती है कि उसमें कानून का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

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