एनडीएचएम में डॉक्टर, अस्पताल, स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने वाले संस्थान, दवा दुकानें, बीमा कंपनियां और नागरिक एक मंच पर होंगे। इसमें प्रमुख रूप से हेल्थ आईडी, डिजि डॉक्टर, स्वास्थ्य सुविधा, स्वास्थ्य संबंधी व्यक्तिगत जानकारी, ई-फॉर्मेसी और टेलिमेडिसिन शामिल हैं। अभी जिन राज्यों में ये व्यवस्था लागू हुई है वहां ई-फॉर्मेसी और टेलीमेडिसिन को छोड़कर सभी सुचारू रूप से काम कर रहे हैं। सभी की निगरानी सरकार करेगी।
पूरे सिस्टम पर सरकार की होगी निगरानी
एनएचए के चीफ एक्जीक्यूटिव इंदु भूषण का कहना है कि एनडीएचएम की सरकार निगरानी करेगी। निजी चिकित्सा संस्थानों को भी ऐसा ढांचा तैयार करने की पूरी छूट होगी। हेल्थ आईडी और डॉक्टर का आवंटन सरकार द्वारा ही होगा। निजी चिकित्सा संस्थान भी पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड सरकारी आदेश के अनुसार तैयार कर सकते हैं। बस सुरक्षा और निजता की सुरक्षा के साथ मानकों का ध्यान रखना होगा।
हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से जोड़ना होगा
हेल्थ आईडी बनने के बाद रोगी अपनी सभी जानकारी डॉक्टर के साथ डिजिटल रूप में साझा कर सकता है। वो ये भी तय कर सकता है कि कौन सा कागजात किसके साथ साझा करना है। रोगी अगर सरकारी योजनाओं का लाभ लेना चाहता है तो उसे अपने हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से जोड़ना होगा। मरीज के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड की एक कॉपी डॉक्टर के पास तो एक वो अपने पास रखेगा जिसपर सरकार की निगरानी रहेगी।