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Action Against Online Fraud: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सक्रिय, गृह मंत्रालय ने बनाई उच्च स्तरीय समिति

Thu, 15 Jan 2026 11:52 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डिजिटल माध्यमों से हो रही ठगी के बढ़ते मामलों ने सरकार और न्यायपालिका की चिंता बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब केंद्र सरकार ने समन्वित जांच और कानूनी खामियों को दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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गृह मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उसने डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले से संबंधित मामलों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। डिजिटल गिरफ्तारी साइबर अपराध का एक बढ़ता हुआ रूप है जिसमें धोखेबाज कानून प्रवर्तन अधिकारियों, अदालती अधिकारियों या सरकारी एजेंसियों के कर्मचारियों के रूप में खुद को पेश करते हैं। ऑडियो और वीडियो कॉल के माध्यम से पीड़ितों को धमकाते हैं। वे पीड़ितों को बंधक बना लेते हैं और उन पर पैसे देने का दबाव डालते हैं।
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गृह मंत्रालय ने किया समिति का गठना
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल दिसंबर में सीबीआई को डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले के मामलों की एकीकृत अखिल भारतीय जांच करने का निर्देश दिया था। हरियाणा के एक बुजुर्ग दंपती की शिकायत पर दर्ज स्वतः संज्ञान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश पारित किए थे। अदालत ने साइबर अपराध मामलों से निपटने के तरीकों पर गृह मंत्रालय समेत विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से भी राय मांगी थी। गृह मंत्रालय ने बताया कि डिजिटल गिरफ्तारी मामलों की व्यापक जांच के लिए विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय अंतर-विभागीय समिति का गठन किया गया है।

समिति का दायित्व प्रवर्तन एजेंसियों के सामने आने वाली वास्तविक समस्याओं की जांच करना, एमिकस क्यूरी (न्यायालय के मित्र) की सिफारिशों और न्यायालय के निर्देशों पर विचार करना, प्रासंगिक कानूनों, नियमों, परिपत्रों और कार्यान्वयन में कमियों की पहचान करना, सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना और आगे के निर्देशों के लिए सुझाव प्रदान करना है। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी।
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समिति में ये होंगे शामिल
मंत्रालय ने बताया कि समिति के सदस्यों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग, विधि और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय, आरबीआई, सीबीआई, एनआईए, दिल्ली पुलिस और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के अधिकारी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि आई4सी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) समिति के सदस्य-सचिव होंगे। समिति की बैठक हर दो सप्ताह में होगी। समिति की पहली बैठक 29 दिसंबर को हुई थी, जब सीबीआई ने मामलों के लिए एक मौद्रिक सीमा निर्धारित करने का सुझाव दिया था।
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न्यायनिर्णय तंत्र की मजबूती पर दिया जोर
गृह मंत्रालय के अनुसार, बैठक में के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत न्यायनिर्णय तंत्र को मजबूत और सक्रिय करने की जरूरत पर जोर दिया। दूरसंचार विभाग ने सूचित किया है कि दूरसंचार अधिनियम के तहत नियमों का मसौदा, अधिसूचना के बाद, सिम कार्ड जारी करने में लापरवाही, एक ही व्यक्ति को कई सिम जारी करने से संबंधित चिंताओं का समाधान करेगा। आई4सी ने सूचित किया है कि पीड़ितों को तत्काल फ्रीजिंग, डी-फ्रीजिंग, वसूली और धन की बहाली के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं पर अंतिम विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के पुनर्गठन पर सक्रिय रूप से विचार किया जा रहा है।

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