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Digital arrest: नकली सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीमा शुल्क व CBI बनकर खेला डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी का खेल

Sat, 07 Jun 2025 09:20 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साइबर अपराध की चौंकाने वाली घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। नकली सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीमा शुल्क व सीबीआई बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी का खेल खेला गया। एक टोली बनाकर आरोपियों ने निर्दोष लोगों को ठगना शुरु कर दिया।
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डिजिटल अरेस्ट - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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नकली सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीमा शुल्क व सीबीआई बनकर 'डिजिटल अरेस्ट' और साइबर धोखाधड़ी का खेल खेला गया। एक टोली बनाकर आरोपियों ने निर्दोष लोगों को ठगना शुरु कर दिया। पहले खुद को नकली सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीमा शुल्क व सीबीआई का अधिकारी बताते और फिर निर्दोष लोगों पर कोई भी आरोप लगा देते। उन्हें यकीन दिलाने के लिए कि वे असली अधिकारी हैं, फर्जी दस्तावेजों पर सुप्रीम कोर्ट, आरबीआई, सीमा शुल्क व सीबीआई का 'लोगो' व 'स्टेंप' भी लगा देते। 

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'डिजिटल अरेस्ट' और 'साइबर धोखाधड़ी' से एकत्रित किया गया पैसा, विभिन्न बैंकों में फर्जी खातों के जरिए जमा करा दिया गया। काली कमाई को सफेद करने के लिए 300 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। भोले भाले लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके खाते खुलवाए गए। ईडी ने अब 13 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी योगेश दुआ और अन्य से जुड़ी 10.08 करोड़ रुपये (लगभग) की संपत्ति को अनंतिम रूप से कुर्क किया है।  

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता जोनल कार्यालय ने सुश्री उमा जैकिंटा बर्नी और अन्य के मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। यह डिजिटल गिरफ्तारी और साइबर धोखाधड़ी का मामला है। ईडी ने इस मामले में विशेष न्यायालय (पीएमएलए), कोलकाता के समक्ष 2 जून को योगेश दुआ, चिराग कपूर और 11 अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दर्ज की है। ईडी ने आईपीसी, 1860 और सूचना और प्रौद्योगिकी, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ साइबर पीएस, कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। 
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ईडी की जांच से पता चला कि आरोपी व्यक्ति निर्दोष पीड़ितों से पैसे ऐंठने की आपराधिक साजिश में शामिल थे। वे पीड़ितों से फोन और व्हाट्सएप के जरिए संपर्क करते थे। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाते थे। वे ऐसे पीड़ितों को गिरफ़्तार करने और संपत्ति ज़ब्त करने की धमकी भी देते थे। आरोपी व्यक्तियों ने पीड़ितों के नाम पर जारी किए गए सर्वोच्च न्यायालय, आरबीआई, सीमा शुल्क और सीबीआई के लोगो लगे जाली पत्रों जैसे धोखाधड़ी वाले दस्तावेज़ बनाए। पीड़ितों से पैसे ऐंठने के लिए इन नकली दस्तावेज़ों का इस्तेमाल किया। इसके बाद, डिजिटल गिरफ़्तारी, निवेश घोटाले और व्हाट्सएप धोखाधड़ी आदि सहित विभिन्न साइबर धोखाधड़ी से संबंधित सात अतिरिक्त एफआईआर को आम आरोपी व्यक्तियों और लिंक किए गए बैंक खातों से जुड़े मामले में मिला दिया गया है। आरोपियों ने कई लोगों के साथ साइबर धोखाधड़ी की है। 

ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि फर्जी व्यक्तियों के नाम पर चालू खाते खोले गए थे, जिन्होंने कमीशन के लालच में अपने नाम बताए थे। इन खातों का इस्तेमाल विभिन्न साइबर धोखाधड़ी के माध्यम से अर्जित धन को इकट्ठा करने के लिए किया गया था। जांच में पता चला है कि घोटालेबाजों ने अपराध की आय को इकट्ठा करने, उसे ठिकाने लगाने और उसे सफेद करने के लिए 300 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया। साथ ही, विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर धोखाधड़ी से सिम कार्ड प्राप्त किए गए। अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सक्रिय होने के बाद, उन्हें लिंक किए गए खातों को संचालित करने के लिए उनके प्रमुख सहयोगियों को विदेश भेज दिया गया। बैंक खातों के आगे के विश्लेषण से पता चलता है कि पीड़ितों से ठगी गई धनराशि को तुरंत कई खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता है, ताकि अवैध आय के निशान को छुपाया जा सके।

इससे पहले, ईडी ने 04.04.2025 को पीएमएलए के प्रावधान के तहत दिल्ली निवासी योगेश दुआ और बेंगलुरु निवासी चिराग कपूर उर्फ चिंतक राज को गिरफ्तार किया था। वर्तमान में, वे न्यायिक हिरासत में हैं। साथ ही, अब तक की गई विभिन्न तलाशियों में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
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