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जयललिता के सामने लेटकर दंडवत करने की कुछ तो वजह रहीं होंगी?

Wed, 07 Dec 2016 01:13 PM IST
वासंती, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
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jayalalitha - फोटो : bbc
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जयललिता की चमत्कारिक इमेज उनकी कई सारी कमियों पर पर्दा डालती थी। उनकी छवि कई बार विरोधाभाष भी पैदा करती थी। 
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पत्रकारों और विरोधियों को मानहानि के आरोपों में अदालत में खींच लेने वाली एक सख़्त राजनेता, माफ़ न करने वाली लीडर, बदला लेने वाली विरोधी, गैरदोस्ताना रवैया रखने वाली असहनशील और निष्ठुर मुख्यमंत्री की छवि ने उनके राज में लिए गए अच्छे प्रशासनिक फ़ैसलों को छाया में ढके रखा।

समर्थकों के लिए जयललिता एक ऐसी महिला थीं, जिन्हें उनके विरोधियों ने खूब परेशान किया। खासकर विरोधी दल डीएमके नेता करुणानिधि ने।

उनके समर्थकों पर लुभावनी योजनाओं की बौछार होती रहती थी। मसलन मिक्सी, ग्राइंडर, सिलाई मशीन, बकरी, उनके बच्चों के लिए साइकिल और लैपटॉप। उन्हें राशन की दुकानों से बीस किलो चावल के बैग मुफ़्त मिलते थे। उनके समर्थकों पर लुभावनी योजनाओं की बौछार होती रहती थी। मसलन मिक्सी, ग्राइंडर, सिलाई मशीन, बकरी, उनके बच्चों के लिए साइकिल और लैपटॉप। उन्हें राशन की दुकानों से बीस किलो चावल के बैग मुफ़्त मिलते थे।
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सिर्फ जयललिता का नाम ही काफी था

jayalalithaa

समर्थकों के नज़रिए से देखें तो हक़ीकत ये थी कि उनकी पार्टी के नेता, उनके मंत्री अजीबो-गरीब तरीके से उनके कदमों में सर झुकाते थे। जब वो हेलीकॉप्टर में सवार होकर आसमान में उड़ान भरती थीं तब भी वो ज़मीन पर उसी तरह दंडवत की मुद्रा में होते थे जैसे कि उनकी मौजूदगी में किया करते थे।

वो ऐसा इस वजह से करते थे क्योंकि ये साफ था कि जयललिता ही पार्टी का चेहरा हैं। वो चाहते थे कि जयललिता की उनके बारे में राय अच्छी रहे जिससे चुनाव के दौरान उन्हें टिकट मिल सके। उनके लिए जयललिता के नाम पर चुनाव में जीत दर्ज कर लेना भर ही काफी था।

उनका व्यक्तित्व ऐसा ही था। साफ रंग और खूबसूरत दिखने वाली महिला। उन्होंने भद्र और सम्मानित महिला की छवि तैयार करने के लिए जान बूझकर खुद को ग्लैमर से दूर कर लिया। एक ऐसी महिला जो पूरी दृढ़ता के साथ राज चला सकती है।

वो अपनी ताकत से वाकिफ थीं और अपनी कमजोर नसों को भी पहचानती थीं। वो कॉन्वेंट में पढ़ी थीं। मिज़ाज से किसी भी तरह की बकवास से दूर रहने वाली महिला थीं।
जब पुरुष उनके पैरों में पड़ जाते थे तो उन्हें यकीनन खुशी मिलती होगी। ये सिलसिला साल 1991 में उनके पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ शुरु हो गया था। तब उनकी उम्र 40 साल से थोड़ी ही ज्यादा थी।
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थीं ब्राह्मण पर ब्राह्मण विरोधी पार्टी का नेतृत्व किया

‘अम्मा’ की फोटो को साक्षी मानकर पन्नीर सेल्वम ने ली सीएम पद की शपथ - फोटो : ANI
जयललिता ने अपना चरण वंदन करने वालों को रोका नहीं। इसकी वजह से उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं से एक दूरी कायम रखने में मदद मिली। जयललिता कभी नहीं चाहती थीं कि वो उनसे वाकिफ हो पाएं।
उनके शासन के दौरान सत्ता के गलियारों में डर का माहौल रहता था। 

मंत्री और उच्चाधिकारी चुप्पी साधे रहते थे। वो उनकी मर्ज़ी के बिना एक भी शब्द बोलने से डरते थे।उनके करिश्मे और पार्टी की उन पर निर्भरता ने एक ऐसा रिश्ता बना दिया जिसे बाहरी लोगों के लिए समझना मुश्किल है।

हालांकि, वो एक साधारण महिला ही थीं जिनकी ज़िंदगी असाधारण बन गई।बउनका नाता कर्नाटक से था। उन्होंने एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया था। वो एक अभिनेत्री रह चुकी थीं। उनके साथ ऐसी तमाम चीजें जुड़ी थीं जो उन्हें कामयाब होने से रोक सकती थीं लेकिन वो एक द्रविड पार्टी की प्रमुख बनीं, जिसकी नींव ब्राह्मणों के विरोध के लिए पड़ी थी और वो अपने मेंटर एमजीआर की जगह लेने में कामयाब रहीं जिन्हें 'देवतुल्य' माना जाता था।

उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों में कई अदालती मामले थे। आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें बरी किए जाने के आखिरी मामले में उन्हें कुछ देर के लिए जेल भी जाना पड़ा लेकिन फिर उन्होंने कोर्ट से ही इस मामले में राहत मिली। इन तमाम मामलों के बावजूद वो अपनी पार्टी और राज्य के लिए किवदंती सरीखी थीं।
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