देश में अलग अलग पर्सनल लॉ को लेकर केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में अहम राय रखी है। केंद्र ने कहा कि विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के नागरिकों के विभिन्न संपत्ति और वैवाहिक कानून देश की एकता का अपमान हैं। इसके साथ ही सरकार ने जोर देकर कहा कि समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने से भारत का एकीकरण होगा।
केंद्र ने यह राय समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की मांग करने वाली एक याचिका के जवाब में दायर हलफनामे में जताई। केंद्र सरकार विधि आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद यूसीसी तैयार करने के मुद्दे पर संबंधित पक्षों से राय मशवरा करेगी।
सरकार ने कहा कि यह मुद्दा महत्वपूर्ण और संवेदनशील है। इसके लिए देश के विभिन्न समुदायों से जुड़े विभिन्न पर्सनल लॉ के गहन अध्ययन की आवश्यकता है। केंद्र ने हलफनामे में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 44 (समान नागरिक संहिता) धर्म को सामाजिक संबंधों और पर्सनल लॉ अलग करता है। केंद्र के वकील अजय दिग्पाल के जरिए दायर हलफनामे में कहा गया है कि अभी विभिन्न धार्मिक और संप्रदायों के नागरिक अलग-अलग संपत्ति और वैवाहिक कानूनों का पालन करते हैं, जो देश की एकता का अपमान है।
केंद्र ने कहा कि 21वें विधि आयोग ने 2018 में यूसीसी से संबंधित विभिन्न मुद्दों की जांच के बाद अपनी सिफारिशों में व्यापक चर्चा के लिए वेबसाइट पर परिवार कानून में सुधार को लेकर एक परामर्श पत्र अपलोड किया था। इस मामले में जब भी विधि आयोग की रिपोर्ट प्राप्त होगी, सरकार मामले में शामिल विभिन्न हितधारकों से सलाह लेगी।
याचिका स्वीकार योग्य नहीं
सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि इस मामले में दायर याचिका स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि यूसीसी तैयार करना नीतिगत मामला है। इस बारे में फैसला जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही कर सकते हैं। इस मामले में कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए जा सकते।
मई 2019 में हाईकोर्ट ने भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। याचिका में यूसीसी बनाने के लिए एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई थी, ताकि राष्ट्रीय एकता, लैंगिक समानता, समानता व महिलाओं के सम्मान को बढ़ावा दिया जा सके।