सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और चार अन्य वरिष्ठ जजों के बीच मतभेद का असर कोलेजियम की कार्यप्रणाली पर नहीं हो रहा है। हालांकि उन्होंने जजों की पदोन्नति और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी के सवाल को टाल दिया लेकिन कहा कि उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया बिना किसी मतभेद के जारी है।
उन्होंने कहा कि जजों के बीच मतभेद का मतलब यह नहीं है कि वे एक-दूसरे से आंख नहीं मिलाते। ‘लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका’ पर आयोजित चर्चा में उन्होंने कहा, ‘हम किसी निजी संपत्ति के लिए नहीं लड़ रहे हैं। मतभेद संस्थागत मसलों को लेकर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम आपस में बात ही नहीं करते।
हालांकि
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जोसेफ और वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा की बतौर जज नियुक्ति में देरी हो रही है लेकिन कोलेजियम ने भी दोबारा इसकी सिफारिश नहीं की। कोलेजियम की दो महीने पहले की गई सिफारिश के बावजूद सरकार ने इन दोनों नामों पर अभी तक सहमति नहीं भेजी है।’ क्या जज साक्षात्कार दे सकते हैं, इसके जवाब में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि अपने फैसले को लेकर साक्षात्कार नहीं दे सकते। लेकिन दूसरे मसले पर तो जरूर बात कर सकते हैं।
मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं सीजेआई
प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के मामले में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ‘मैं अब तक यह समझ नहीं पाया हूं कि आखिर मेरी पीठ द्वारा आदेश पारित करने में क्या परेशानी थी। यह चलन रहा है कि जब चीफ जस्टिस संविधान पीठ में बैठते हैं तो दूसरे वरिष्ठतम जज के समक्ष मेंसनिंग होती है। मैं अब भी मानता हूं कि मैं अपने अधिकार के दायरे में रहते हुए पांच वरिष्ठतम जजों वाली संविधान पीठ के गठन का आदेश दिया था।’ सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा द्वारा सुनने का निर्णय लेने के सवाल पर जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा अगर चीफ जस्टिस ऐसा चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने दिया जाए। चीफ जस्टिस मास्टर ऑफ रोस्टर होते हैं। अगर उन्हें सभी कामों करने की ऊर्जा हैं तो उन्हें करने दिया जाए।