मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे द्वारा नए सिरे से भूख हड़ताल की चेतावनी दिए जाने के दो दिन बाद महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार मराठा आरक्षण और कुंबी प्रमाणपत्र से जुड़ी मांगों पर अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट मनोज जरांगे को भेजेगी, ताकि उन्हें सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी मिल सके।
सरकार जरांगे को क्या जानकारी भेजेगी?
महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि मनोज जरांगे को उनकी सभी प्रमुख मांगों पर अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके साथ ही सरकार यह भी बताएगी कि शेष मांगों को लागू करने की प्रक्रिया किस समय-सीमा में पूरी की जाएगी।
शिंदे समिति की जांच में क्या सामने आया?
राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने बताया कि न्यायमूर्ति शिंदे समिति की जांच में मराठा समुदाय के 58 लाख लोगों के कुंबी रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें से लगभग आधे लोगों को अब तक कुंबी जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि बाकी मामलों की प्रक्रिया जारी है।
हैदराबाद गजट को लेकर सरकार का क्या रुख है?
मंत्री ने कहा कि सरकार ने मनोज जरांगे की उस मांग को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कुंबी रिकॉर्ड की जांच के लिए हैदराबाद गजट को आधार बनाने की बात कही गई थी। सरकार के अनुसार, इस फैसले पर अमल भी शुरू हो चुका है।
मनोज जरांगे ने फिर आंदोलन की चेतावनी क्यों दी?
मनोज जरांगे ने बुधवार को घोषणा की थी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं तो वह 29 अगस्त से अपना 'आखिरी और निर्णायक' आंदोलन शुरू करेंगे। उनका आरोप है कि 58 लाख कुंबी रिकॉर्ड मिलने के बावजूद सरकार हैदराबाद गजट के अनुसार लोगों को कुंबी जाति प्रमाणपत्र जारी नहीं कर रही है।
मराठा समुदाय की मुख्य मांग क्या है?
मनोज जरांगे लंबे समय से मराठा समुदाय को कुंबी जाति का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मराठा समुदाय को कुंबी का दर्जा मिलता है तो उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।
सरकार ने भरोसा कैसे दिलाया?
कैबिनेट की मराठा आरक्षण उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि सरकार केवल रिपोर्ट ही नहीं भेजेगी, बल्कि मांगों को लागू करने की स्पष्ट समय-सीमा भी मनोज जरांगे को बताएगी, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
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अभिजीत दिपके के आरोपों पर मंत्री ने क्या कहा?
'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके के इस आरोप पर कि उन्हें सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल न होने पर परेशान करने की धमकी दी गई, राधाकृष्ण विखे-पाटिल ने कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो दिपके को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि उन्हें धमकी किसने दी है।