सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा द्वारा नौकरी से त्यागपत्र देने के बाद कांग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल दिया है। पार्टी नेता एवं राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि आलोक वर्मा के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी ने जो फैसला दिया है, वह सीवीसी रिपोर्ट के आधार पर नहीं, बल्कि राकेश अस्थाना ने जो कुछ लिखकर दिया, उसके तहत फरमान सुना दिया गया। पहले अस्थाना की रिपोर्ट को सीवीसी ने माना और बाद में सीवीसी ने वही बातें सेलेक्ट कमेटी के सामने रख दी। कमेटी ने वर्मा को अपनी बात कहने का मौका न देकर सीधे उसी रिपोर्ट पर कार्रवाई की।
शुक्रवार को अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, मोदी सरकार राफेल की जांच से डर कर सीवीसी जैसी संस्था के पीछे लुका-छिपी कर रही है। आलोक वर्मा को अपनी बात कहने से रोक दिया गया। सीवीसी ने कमेटी के सामने वही रिपोर्ट पेश की, जिसे भ्रष्टाचार के आरोपी राकेश अस्थाना ने तैयार किया था। अस्थाना ने जो भी आरोप वर्मा के खिलाफ लगाए थे, उनमें से 99 फीसदी को सीवीसी ने मान लिया। सीवीसी ने सेलेक्ट कमेटी के सामने जो बातें रखी, उनमें से कोई भी कहीं नहीं ठहरती। सिंघवी के मुताबिक, सीवीसी ने मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने खुद का जमकर दुरुपयोग कराया।
राकेश अस्थाना वही व्यक्ति हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज है। उसके मामले की जांच खुद सीबीआई कर रही है। कांग्रेसी नेता का दावा है कि आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी करने वाले जस्टिस एके पटनायक को भी रिपोर्ट नहीं दिखाई गई। वर्मा के मामले में दिए गए एक तरफा फैसले से साफ हो गया है कि मोदी की अध्यक्षता वाली सेलेक्ट कमेटी बड़ी नहीं, बल्कि सीवीसी सबसे बड़ी संस्था है। यही वजह रही कि एक व्यक्ति के आरोपों को आधार बनाकर सेलेक्ट कमेटी ने अपना फैसला दे दिया।
सेलेक्ट कमेटी के फैसले को चुनौती दी जा सकती है: सिंघवी
सिंघवी का कहना था कि सेलेक्ट कमेटी के फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इस कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या उनके प्रतिनिधि जो भी मौजूद होते हैं, वे न्यायाधीश के तौर पर नहीं, बल्कि एक सदस्य के आधार पर सेलेक्ट कमेटी में होते हैं। वहां पर वे न्यायिक क्षमता में नहीं होते। यही वजह है किे कमेटी का फैसला चेलेंज हो सकता है।