मुंबई के कुर्ला में रविवार की सुबह का नजारा कुछ बदला सा था। एक दिन में इतने सारे लोगों को खाकी वर्दी पहने, हाथ में पेपर और पार्सल लिए इसके पहले लोगों ने नहीं देखा था। 22 पोस्टमैन बोरियां भरके 14000 चिट्ठियां लिए लोगों के घरों तक पहुंचा रहे थे। यह वह चिट्ठियां थी, जो उन्हें साल या 2 साल पहले आई थी। लेकिन कभी मिली नहीं। पोस्टमैनों की लापरवाही के कारण पिछले 2 साल से कुर्ला में किसी के घर कोई चिट्ठी ही नहीं पहुंचाई गई। इसके लिए जिम्मेदार, 27 साल से पोस्टमैन की नौकरी कर रहे एस. टी. बललाल के खिलाफ जांच के आदेश देकर उसे सस्पेंड कर दिया गया।
आपको बता दें कि छदवा नगर में 2015 से अबतक की इन चिट्ठियों में कई मैग्जीन, कैलेंडर, बीमा कंपनियों की चिट्ठियां, फोन बिल वगैरह थे। इसके अलावा तकरीबन 2000 से ऊपर आधार कार्ड थे।
इस बात का खुलासा तब हुआ जब कुर्ला पश्चिम की मैच फैक्ट्री लेन पर छडवा नगर सोसाइटी में रहने वाले विपुल विसारिया ने कैबिन में कागजों का ढेर देखा। बललाल तीन जगहों पर लोगों की चिट्ठियों को फेंकता था। उन तीन जगहों में से एक जगह हाउसिंग सोसाइटी में वॉचमैन का कैबिन भी था।
सोसाइटी की प्रबंध समिति के सदस्य विपुल ने कहा, कि हमने कई बार पोस्टमैन से कहा कि वो यहां से इन बैग्स को ले जाए। लेकिन वो बातों को अनसुना कर देता था। इसलिए हमने तय किया कि हम लोकल पोस्ट ऑफिस में पोस्टमैन की शिकायत करेंगे। विपुल ने चिट्ठियों से भरे बैग की फोटोज को रेलवे स्टेशन के पास नई मिल रोड वाले पोस्ट ऑफिस को भेज दी। जिसके बाद पोस्टमैन एस.टी.बललाल को सस्पेंड कर दिया गया।
मुंबई क्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल वीके गुप्ता और महाराष्ट्र क्षेत्र के चीफ पोस्टमास्टर जनरल एच सी अग्रवाल ने कहा कि हमें इस घटना के बारे में कोई सूचना नहीं थी। इसलिए हम इस पर कोई एक्शन नहीं ले पाए। वहीं बललाल के एक सहकर्मी ने बताया कि हमें समझ नहीं आ रहा कि बललाल ने ऐसा क्यों किया जबकि उसकी रिटायरमेंट के सिर्फ 6 साल बाकी हैं। अगर उसको कोई परेशानी या समस्या थी तो वह हमें बता सकता था। जरूर उसकी कोई समस्या का हल निकलता।
डाकघर के कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें आश्चर्यच है कि इस संबंध में उन्हें स्थानीय निवासियों से एक भी शिकायत नहीं मिली। "अगर किसी ने हमें बताया होता कि उन्हें पत्र नहीं मिल रहे हैं तो हम इस बारे में बहुत जल्द पता लगा सकते थे।