एक सप्ताह पहले पाक की पीर पंजाल रेंज के पास मुर्री शहर एक रिजॉर्ट में भारतीय बिजनेस टायकून सज्जन जिंदल और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुलाकात को बॉर्डर पर भारतीय सैनिकों के साथ की गई बर्बरता से जोड़ कर देखा जा रहा है।
बताया जाता है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री भारतीय बिजनेस जगत के प्रति नर्म हैं और ऐसे में जिंदल से उनका मिलना संयोग नहीं माना जा सकता। साथ ही यह मुलाकात तब हुई, जब पनामा पेपर लीक मामले में नवाज शरीफ की संपत्ति जांच के दायरे में थी। इसके अलावा 'द डॉन' की एक रिपोर्ट के अनुसार सरकार और सेना के बीच तनातनी की खबरें भी सामने आ गईं थी।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि जब भी भारत-पाक के बीच बातचीत होने वाली होती है, उससे ठीक पहले हमले, आतंकी साजिश या ऐसी घटनाएं सामने आती हैं और बातचीत नहीं हो पाती। गौरतलब है कि पिछले साल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाहौर दौरे के दो सप्ताह बाद ही पठानकोट हमला हुआ। इसी तरह 199 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के 'लाहौर डिक्लेरेशन' साइन करने बाद ही कारगिल युद्ध छिड़ गया।