नई दिल्ली, 6 दिसंबर। इंडिगो संकट से पूरे देश में भारी बवाल खड़ा हो गया है। पिछले चार दिनों में इंडिगो दो हजार से अधिक उड़ानों को रद्द कर चुका है। इससे लाखों यात्री अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। कोई अपनी नौकरी नहीं ज्वाइन कर पाया तो कोई इलाज के लिए अस्पताल नहीं पहुंच पाया। किसी को अपनी विदेश यात्रा टालनी पड़ी तो किसी की बिजनेस डील कैंसिल हो गई। इस पूरी अव्यवस्था के लिए इंडिगो एयरलाइन्स को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लेकिन विपक्षी दलों से लेकर सोशल मीडिया तक इस पूरी अव्यवस्था के लिए केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं जिसने समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं की।
सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि इंडिगो प्रमोटर राहुल भाटिया ने भाजपा को तगड़ा चंदा देकर अपनी गलतियों के प्रति नागरिक उड्डयन मंत्रालय का मुंह बंद कर दिया है जिसके कारण इंडिगो की खुली लापरवाही दिखने के बाद भी अब तक उस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। इंडिगो की ये कमियां करीब दो साल पहले ही सामने आ गई थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और स्थिति लगातार बद से बदतर होती रही।
डीजीसीए ने पायलटों के साथ-साथ सभी केबिन क्रू के काम करने और छुट्टी लेने के नियमों (एफडीटीएल) को कड़ा कर रखा है। इससे क्रू को आराम भी मिलता है और एयरलाइंस का काम भी गुणवत्तापूर्ण तरीके से चलता है। नए नियम लागू किए गए हैं और सभी एयरलाइंस इसके अनुसार कार्य कर रही हैं। किसी भी एयरलाइंस ने नए नियमों के विरुद्ध अपनी कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है। लेकिन वर्तमान संकट के बाद कथित तौर पर इन नियमों से इंडिगो को छूट दे दी गई है। इससे पायलट और अन्य क्रू स्टाफ में गहरी नाराजगी है क्योंकि नियमों में छूट के बाद स्टाफ को पर्याप्त आराम का समय नहीं मिलता है और सेवाओं के प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। जिस तरह डीजीसीए ने इंडिगो के लिए अपने नियमों में ढील दी है, उसे भी इंडिगो ग्रुप की सत्ता के गलियारों में धमक का ही परिणाम बताया जा रहा है।
इंडिगो ने किसको दिया कितना चंदा
इंडिगो के प्रमोटर राहुल भाटिया के इंटरग्लोब ग्रुप की कुछ कंपनियों ने कई राजनीतिक दलों को तगड़ा चंदा दिया है। इसकी सबसे बड़ी लाभार्थी भारतीय जनता पार्टी है, लेकिन विपक्ष के दलों के साथ-साथ दूसरे दल भी इसमें पीछे नहीं हैं। कांग्रेस ने भी इंडिगो से भारी चंदा प्राप्त किया है। इलेक्टोरल बॉन्ड के आंकड़ों के अनुसार इंडिगो ग्रुप की कंपनियों ने विभिन्न राजनीतिक दलों को लगभग 56 करोड़ रुपये का चंदा दिया है।
भाजपा को इंडिगो ग्रुप से मिला 31 करोड़ रुपये का चंदा
सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को 31 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड के रूप में मिला है। भाजपा को 20 करोड़ रुपये का चंदा इंडिगो की सहयोगी कंपनी इंटरग्लोब रियल स्टेट वेंचर से मिला था। इसी ग्रुप की इंडिगो (इंटरग्लोब एयर ट्रांसपोर्ट लिमिटेड) ने भाजपा को 11 करोड़ रुपये का चंदा दिया है। केंद्र और विभिन्न राज्यों में सत्ता में होने के कारण भाजपा को सबसे ज्यादा चंदा मिलने का आधार कहा जा सकता है।
एडीआर के आंकड़ों के अनुसार, इंडिगो (इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड) ने 6 अक्टूबर 2023 को कांग्रेस को पांच करोड़ रुपये का चंदा दिया। ये चंदे एक-एक करोड़ रूपये के पांच इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दिए गए। इस तरह देश का सबसे बड़ा विपक्षी दल भी इंडिगो की चंदा सेवा का लाभार्थी है।
ममता बनर्जी की टीएमसी को मिले 16.2 करोड़ रुपये
आश्चर्यजनक लग सकता है, लेकिन यह सही है कि इंडिगो ग्रुप ने कांग्रेस से ज्यादा चंदा ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इंडिगो ग्रुप से कांग्रेस से तीन गुना से अधिक यानी 16.2 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त किया है। वर्तमान में एनडीए की महाराष्ट्र में एक महत्त्वपूर्ण सहयोगी पार्टी एनसीपी (मूल रूप से शरद पवार की पार्टी जो कांग्रेस के साथ रही, लेकिन भतीजे अजित पवार की बगावत के बाद एनडीए में शामिल हुई) ने भी इंडिगो से 3.8 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त किया।
केजरीवाल को 70 लाख रुपये
इंडिगो सबसे तगड़ा मुनाफा कमाने वाली एयरलाइंस कंपनी है। इसका दूसरे दलों को चंदा देना समझ में आता है। लेकिन एक ऐसी एयरलाइंस कंपनी भी है जो घाटे में होते हुए भी एक राजनीतिक दल को चंदा दे रही थी। यह कंपनी थी स्पाइसजेट जो अपने कर्मचारियों को मासिक वेतन और पीएफ के पैसे तक नहीं दे पा रही थी, लेकिन इसी बीच उसने आम आदमी पार्टी को 70 लाख रुपये का चंदा दिया था।
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लंबे समय से दी जा रही थी चेतावनी
इंडिगो के एक यात्री ने अमर उजाला से अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वे इंडिगो एयरलाइन्स से अहमदाबाद से दिल्ली की यात्रा करने वाले थे। लेकिन अहमदाबाद एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद पता चला कि उनकी फ्लाइट लेट है। स्टाफ ने बताया कि एक फ्लाइट दिल्ली जाने के लिए तैयार है। वह दिल्ली पहुंचकर वापस अहमदाबाद आएगी। इसके बाद उसी फ्लाइट से इस फ्लाइट के यात्रियों को ले जाया जाएगा। यात्री के अनुसार, वे रात एक बजे के करीब अहमदाबाद से दिल्ली के लिए तभी उड़ सके जब उक्त फ्लाइट दिल्ली जाकर वापस लौटकर आई।
इस स्थिति के बारे में डीजीसीए से लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय तक सबको जानकारी है, इंडिगो के पास एरोप्लेन हैं, यात्री हैं, लेकिन उसके पास पायलट और अन्य क्रू नहीं है। इसे ठीक करने के लिए बार-बार चेतावनी भी दी गई, लेकिन इंडिगो ने अपनी सेवाओं में कोई सुधार नहीं किया।
क्या सहयोगी दलों के दबाव में आ गई केंद्र सरकार
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने इस पूरे मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा है कि स्पष्ट तौर पर यह इंडिगो की लापरवाही का मामला है। इस पर सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन इसे नागरिक उड्डयन मंत्रालय और डीजीसीए की भी बड़ी गलती मानी जा रही है जिसके लिए सीधे तौर पर राम मोहन नायडू पर जिम्मेदारी बनती है। आम तौर पर प्रधानमंत्री इस तरह की कोई लापरवाही होने पर अपने मंत्रियों पर कड़ा रुख अपनाते हैं। कामकाज में लापरवाही के कारण कुछ मंत्रियों से इस्तीफे ले लिये गए, या उनके विभाग बदल दिए गए, लेकिन जिस तरह अब तक राम मोहन नायडू पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, उसे भाजपा के केंद्र में कमजोर होने और गठबंधन धर्म की मजबूरी बताया जा रहा है। हालांकि, इस मामले पर अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाया है। समस्या के जल्द हल होने की बात कही गई है।