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12 साल का भव्य शाह बना जैन भिक्षु, फरारी से निकाली गई यात्रा

Sat, 24 Mar 2018 09:09 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सूरत
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भव्य शाह
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जिस छोटी सी उम्र में बच्चे खेलने-कूदने और खिलौने खेलने में व्यस्त होते हैं, क्या उस उम्र में कोई बच्चा सभी सांसारिक सुखों को छोड़कर संत बनने के बारे में विचार कर सकता है? आपका जवाब होगा नहीं लेकिन यह सच है। गुजरात के सूरत जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जहां हीरा कारोबारी दीपेश शाह के 7वीं कक्षा में पढ़ने वाले भव्य शाह ने जैन भिक्षु बनने का फैसला लिया है। 

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भव्य ने आखिरी बार अपने परिजनों से मुलाकात कर ली है। परिवार वाले अपने लाडले को जीभर कर देखना चाहते थे। इसके बाद बेटे की मुहूर्त यात्रा बेहद ही शानदार तरीके से फरारी में निकाली गई। इस गाड़ी को भव्य के पिता के दोस्त जयेश देसाई ने भेजा था। जिससे वह आखिरी बार अपनी इच्छा को पूरा कर सके। भव्य को गाड़ियों और परफ्यूम का शौक था। मगर दीक्षा लेने के बाद उसे सादा जीवन जीना पड़ेगा और पैदल चलना होगा।

भव्य की शोभा यात्रा बड़ी ही धूमधाम के साथ खुली जीप में निकाली गई। उनके पिता दीपेश का कहना है कि भव्य पिछले डेढ़ साल से उनके गुरुजी के पास रह रहा था और उसे मालूम है कि जिस रास्ते पर वह चलने वाला है उसमें काफी कठिनाईयां है। बता दें कि दीपेश के दो बेटे और एक बेटी है। चार साल पहले 12 साल की उम्र में ही भव्य की बड़ी बहन प्रियांशी ने दीक्षा ग्रहण की थी। अब उसी उम्र में भाई भी संत बन रहा है। भव्य की दीक्षा 12 अप्रैल को पूरी हो जाएगी।

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