विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) अपने तकनीकी मामलों के सेवानिवृत्त अधिकारियों का एक समूह बनाने की योजना बना रहा है, ताकि वे एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट औ फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूलों के लाइसेंस जैसी विभिन्न प्रमाणन प्रक्रियाओं में संस्थाओं की मदद कर सकें। डीजीसीए ने सोमवार को एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया, जिसमें कहा गया कि उसने समूह के लिए नियम भी तैयार कर लिए हैं, ताकि सेवानिवृत्त अधिकारी प्रमाणन प्रक्रियाओं में सलाह दे सकें।
नियामक पांच चरणों वाली प्रमाणन प्रक्रिया का पालन करता है। परिपत्र में कहा गया, अक्सर देखा गया है कि आवेदकों और संस्थाओं को पूरी प्रक्रिया समझने में कठिनाई होती है, जिससे देरी होती है और अनुपालन से जुड़ी समस्याएं आती हैं। इसे देखते हुए संगठन अपने उन सेवानिवृत्त अधिकारियों का एक पूल बनाने का प्रस्ताव रखता है, जिनके पास व्यापक संस्थागत ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव है। ये अधिकारी परामर्शदाता के रूप में संस्थाओं को मार्गदर्शन देंगे, प्रक्रिया को सुचारु बनाएंगे और सभी चरणों को समय पर और प्रभावी तरीके से पूरा करने में मदद करेंगे।
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ये सेवानिवृत्त तकनीकी अधिकारी एयर ऑपरेटर प्रमाणपत्र/एयर ऑपरेटर परमिट जारी करने, उड़ान प्रशिक्षण संस्थान (फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल) के लाइसेंस, विमान रखरखाव संगठनों और निरंतर उड़ान-सुरक्षा प्रबंधन संगठनों जैसी प्रक्रियाओं में सलाह देंगे।
सर्कुलर में यह भी कहा गया कि सलाहकार पारदर्शिता, तकनीकी सटीकता और अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन के मानकों के अनुरूप काम करेंगे और डीजीसीए के फैसलों पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगे। तेजी से बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए एयरलाइंस अपने विमान बेड़े का विस्तार कर रही हैं और पूरे विमानन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही हैं। भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में से एक है।