विमानन नियामक संस्था डीजीसीए ने पायलटों की मेडिकल जांच के लिए निजी एयरोमेडिकल मूल्यांकन केंद्रों को भी सूचीबद्ध करने का फैसला किया है। डीजीसीए के इस कदम पर एयरलाइंस पायलटों के संगठन एएलपीए इंडिया ने खुशी जाहिर की है और एक बयान में कहा है कि इससे भारतीय वायु सेना के केंद्रों पर होने वाली पायलटों की रूटीन जांच का अंत होगा।
पायलटों की एसोसिएशन ने जताई खुशी
पायलटों के समूह एएलपीए इंडिया ने कहा है कि इस कदम से पायलटों की मेडिकल जांच सुचारू होगी, साथ ही उच्च दक्षता सुनिश्चित होगी और अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का भी बेहतर तरीके से पालन हो सकेगा। एएलपीए इंडिया द्वारा लंबे समय से निजी एयरोमेडिकल मूल्यांकन केंद्रों की मांग की जा रही थी। संगठन ने कहा कि यह कदम सैन्य और नागरिक चिकित्सा मूल्यांकन ढांचों को अलग करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो भारत को वैश्विक विमानन प्रथाओं के अनुरूप बनाएगा। एसोसिएशन ने वायु सेना के चिकित्सा मूल्यांकन केंद्रों पर रसद संबंधी असुविधा, गुणवत्तापूर्ण जांच की कमी और अपारदर्शी प्रक्रियाओं को लेकर चिंता जताई थी।
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पायलटों के एसोसिएशन ने बताया कि पहले हर पांचवें मेडिकल परीक्षण को भारतीय वायुसेना केंद्रों पर करवाने की अनिवार्यता के कारण अक्सर उन पायलटों को अनुचित रूप से उड़ान भरने से रोक दिया जाता था जबकि वे उड़ान भरने के लिए फिट होते थे। एएलपीए इंडिया, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एयर लाइन पायलट्स एसोसिएशन (आईएफएएलपीए) में भारतीय पायलटों का प्रतिनिधित्व करता है।
क्या होते हैं एयरोमेडिकल केंद्र
एयरोमेडिकल मूल्यांकन केंद्र (AEMC) ऐसे केंद्र होते हैं जो विमानन से जुड़े लोगों, जैसे कि पायलटों, हवाई यातायात नियंत्रकों और केबिन क्रू की सेहत की जांच और मूल्यांकन करते हैं। इस जांच से सुनिश्चित किया जाता है कि पायलट और अन्य कर्मचारी अपनी ड्यूटी करने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हैं। इन केंद्रों को एयरो-मेडिकल प्रमाणपत्र जारी करने के लिए प्रमाणित किया जाता है। ये प्रमाणपत्र उड्डयन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए जरूरी होता है।