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DGCA Corruption Case: CBI ने डीजीसीए के दो अफसरों पर शिकंजा कसा, तीन दिन की कस्टडी में भेजा गया; जानिए मामला

Mon, 20 Apr 2026 11:55 AM IST
Riya Dubey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर जनरल मुदावथ देवुला और निजी कंपनी प्रतिनिधि भरत माथुर को रिश्वत मामले में तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा है। सीबीआई ने आरोपियों को 2.5 लाख रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।
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CBI - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक गंभीर मामले में डीजीसीए के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (एयरवर्थिनेस डायरेक्टरेट) मुदावथ देवुला और एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि भरत माथुर को तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। दोनों आरोपियों को रविवार, 19 अप्रैल को अदालत में पेश किया गया, जहां सीबीआई ने विस्तृत पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की थी। अदालत ने एजेंसी की मांग स्वीकार करते हुए दोनों को तीन दिन की कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।

क्या है मामला?

सीबीआई के अनुसार, एजेंसी ने 18 अप्रैल 2026 को यह मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि डीजीसीए अधिकारी पर आरोप है कि उसने डीजीसीए में लंबित फाइलों, मंजूरी और लाइसेंस से जुड़े आवेदनों को पास कराने के बदले निजी पक्षों से अवैध लाभ यानी रिश्वत की मांग की। बताया गया कि यह रिश्वत एक निजी कंपनी के प्रतिनिधि के माध्यम से ली जानी थी।

सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने ट्रैप ऑपरेशन चलाया। एजेंसी ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा और मौके से 2.5 लाख रुपये की पूरी रिश्वत राशि बरामद की। सीबीआई का कहना है कि यह रकम लंबित आवेदन और स्वीकृतियों को आगे बढ़ाने के बदले ली जा रही थी।

चार ठिकानों पर की गई छापेमारी 

गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने दिल्ली में आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों के चार ठिकानों पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान 37 लाख रुपये नकद, सोने और चांदी के सिक्के, कई डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डाटा और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। एजेंसी अब इन सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि रिश्वतखोरी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।

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शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सीबीआई ने नई दिल्ली में डाक विभाग के डाक अधीक्षक को शिकायतकर्ताओं से कथित तौर पर 10,000 रुपये की मांग करने और स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया। सीबीआई ने उक्त आरोपियों के खिलाफ 17 अप्रैल को यह मामला दर्ज किया था। इसमें आगे कहा गया है कि आरोप है कि आरोपी अधीक्षक ने शिकायतकर्ताओं से उनके शाखा स्थानांतरण को रोकने और उनकी छुट्टी स्वीकृत करने के लिए 20,000 रुपये का अनुचित लाभ मांगा था।

सीबीआई अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर यह जानने की कोशिश करेगी कि यह कथित भ्रष्टाचार कब से चल रहा था, किन-किन कंपनियों या व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया, कितनी बार रिश्वत ली गई और क्या DGCA के अन्य अधिकारी भी इस नेटवर्क का हिस्सा थे।
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