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देवीशंकर अवस्थी सम्मान: दलपत सिंह राजपुरोहित किए गए सम्मानित, अलोचना पुस्तक के लिए दिया गया पुरस्कार

Sun, 06 Apr 2025 05:55 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2024 का देवीशंकर अवस्थी सम्मान युवा आलोचक दलपत सिंह राजपुरोहित को उनकी आलोचना पुस्तक 'सुंदर के स्वप्न : आरंभिक आधुनिकता, दादूपंथ और सुंदरदास की कविता' के लिए प्रदान किया गया है।
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आलोचक दलपत सिंह राजपुरोहित - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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साल 2024 का देवीशंकर अवस्थी सम्मान युवा आलोचक दलपत सिंह राजपुरोहित को उनकी आलोचना पुस्तक 'सुंदर के स्वप्न : आरंभिक आधुनिकता, दादूपंथ और सुंदरदास की कविता' के लिए प्रदान किया गया। देवीशंकर अवस्थी के जन्मदिन के अवसर पर 5 अप्रैल, 2025 को नई दिल्ली के साहित्य अकादेमी सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने प्रशस्तिपत्र, स्मृति चिह्न और पच्चीस हजार रुपये की राशि प्रदान कर दलपत सिंह राजपुरोहित को सम्मानित किया।

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समिति की ओर से अशोक वाजपेयी ने प्रशस्ति वाचन किया। इस वर्ष की सम्मान चयन समिति में अशोक वाजपेयी, मृदुला गर्ग, पुरुषोत्तम अग्रवाल और अनुराग अवस्थी शामिल थे। आलोचना के क्षेत्र में दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित पुरस्कार सुप्रसिद्ध आलोचक स्वर्गीय श्री देवीशंकर अवस्थी की स्मृति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कमलेश अवस्थी द्वारा वर्ष 1995 में स्थापित किया गया। यह सम्मान अवस्थी जी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष 45 वर्ष तक की आयु के किसी युवा आलोचक को दिया जाता है। 

अब तक यह सम्मान सर्वश्री मदन सोनी, पुरुषोत्तम अग्रवाल, विजय कुमार, सुरेश शर्मा, शम्भुनाथ, वीरेन्द्र यादव, अजय तिवारी, पंकज चतुर्वेदी, अरविन्द त्रिपाठी, कृष्ण मोहन, अनिल त्रिपाठी, ज्योतिष जोशी, प्रणय कृष्ण, प्रमीला के.पी., संजीव कुमार, जितेन्द्र श्रीवास्तव, प्रियम अंकित, विनोद तिवारी, जितेन्द्र गुप्ता, वैभव सिंह, पंकज पराशर, अमिताभ राय, मृत्युंजय पाण्डेय, राहुल सिंह, आशुतोष भारद्वाज, अच्युतानंद मिश्र, सुश्री सुजाता, निशांत को प्रदान किया जा चुका है। 
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कार्यक्रम के आरम्भ में देवीशंकर अवस्थी की धर्म पत्नी और इस सम्मान की संस्थापिका कमलेश अवस्थी की स्मृति में एक मिनट का मौन रखा गया। अशोक वाजपेयी ने कमलेश अवस्थी से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने देवीशंकर अवस्थी सम्मान की यात्रा और आलोचना के विकास में इस सम्मान के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। कमलेश अवस्थी को याद करते हुए विश्वनाथ त्रिपाठी ने कहा कि कमलेश अवस्थी एक सांस्कृतिक व्यक्तित्व थीं।

पुरस्कृत आलोचक दलपत सिंह राजपुरोहित अपरिहार्य कारणो से कार्यक्रम में नहीं आ सके। उनकी अनुपस्थिति में उनका लिखित वक्तव्य अजय कुमार यादव ने पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा इस सम्मान से न केवल मेरा सम्मान हुआ है बल्कि मध्यकालीन साहित्य का भी सम्मान हुआ है। सुंदर दास की लेखनी यह बताती है कि कविता कैसे मंत्र या प्रार्थना का रूप ले सकती है। सत्य की खोज के लिए विवेकपूर्ण और तर्कसंगत आस्था आवश्यक है। 

इसके पश्चात वरिष्ठ लेखक रवीन्द्र त्रिपाठी ने श्री देवी शंकर अवस्थी के लेख ‘नए पुराने के बीच सहअस्तित्व का संघर्ष’ के एक अंश का पाठ किया। इस अवसर पर 'आस्था की विडंबनाएं' विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में सुधा रंजनी, पुरूषोत्तम अग्रवाल और रमाशंकर सिंह ने अपने विचार व्यक्त किये। 

कार्यक्रम में दिल्ली स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों के अध्यापक व छात्रों सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं संस्कृतिप्रेमी उपस्थित थे। स्वर्गीय देवीशंकर अवस्थी जी के बड़े सुपुत्र अनुराग अवस्थी ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों और मीडिया बंधुओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन अशोक वाजपेयी ने किया।

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