Maharashtra Politics: महायुति में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सबसे अहम दल हैं। कैबिनेट विस्तार में अजित पवार के गुट ने सबसे अधिक पांच नेताओं को नए मंत्रिमंडल से बाहर रखा है। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना से ऐसे नेताओं की संख्या तीन-तीन है।
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Maharashtra Cabinet
- फोटो : Amar Ujala
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महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन महायुति के कैबिनेट विस्तार के बाद अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। दरअसल, पिछली महायुति कैबिनेट से इस बार 11 मंत्रियों को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली नई सरकार में जगह नहीं दी गई। इस वजह से ऐसे नेता और उनके समर्थकों में बेचैनी पैदा हो गई है। कुछ नेताओं के समर्थकों विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो कुछ नेता तो सीधे तौर पर नाराजगी जता रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा नाराजगी येओला में छगन भुजबल के समर्थकों के बीच देखने को मिल रही है। भुजबल खुद भी भविष्य की रणनीति तय करने की बात कर चुके हैं।
दरअसल, महायुति में भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सबसे अहम दल हैं। कैबिनेट विस्तार में अजित पवार के गुट ने सबसे अधिक पांच नेताओं को नए मंत्रिमंडल से बाहर रखा है। इसमें छगन भुजबल, धर्मराव बाबा आत्राम, संजय बनसोडे, दिलीप वाल्से पाटिल और अनिल पाटिल शामिल हैं। भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना से ऐसे नेताओं की संख्या तीन-तीन है। भाजपा ने रवींद्र चव्हाण, सुधीर मुनगंटीवार और विजयकुमार गावित को नई टीम से बाहर रखा है, जबकि शिवसेना ने तानाजी सावंत, अब्दुल सत्तार और दीपक केसरकर को नई कैबिनेट में शामिल नहीं किया है।
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महाराष्ट्र में कैबिनेट विस्तार
- फोटो : ANI
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देवेंद्र फडणवीस की नई टीम
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में रविवार को महायुति के घटक दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिवसेना और राकांपा के 39 विधायकों ने शपथ ली। इनमें 33 कैबिनेट स्तर के और छह अन्य राज्य मंत्री हैं। भाजपा को 19 मंत्री पद मिले, जबकि शिवसेना को 11 और राकांपा को नौ मंत्री पद मिले। इस विस्तार की अहम बात यह भी है कि कैबिनेट से 11 पूर्व मंत्रियों को हटा दिया गया और 16 नए चेहरों को शामिल किया गया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने रविवार को कैबिनेट विस्तार के बाद कहा था कि महायुति सहयोगी ने अपने कार्यकाल के दौरान मंत्रियों का ‘प्रदर्शन ऑडिट’ कराने पर सहमति जताई है।
भुजबल ने दिखाए बगावती तेवर
राकांपा के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने सोमवार को नई महायुति सरकार में शामिल नहीं किए जाने पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से बात करने के बाद भविष्य की राह तय करेंगे। भुजबल ने कहा कि मैं एक साधारण राजनीतिक कार्यकर्ता हूं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुझे दरकिनार कर दिया गया या पुरस्कृत किया गया। मंत्री पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन उन्हें खत्म नहीं किया जा सकता।
भविष्य के कदम के बारे में पूछे जाने पर नासिक जिले के येओला निर्वाचन क्षेत्र के विधायक ने कहा कि मुझे देखने दीजिए। मुझे इस पर विचार करने दीजिए। मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से बात करूंगा और समता परिषद के साथ चर्चा करूंगा।
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सुधीर मुनगंटीवार
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मंत्रियों की सूची से मेरा नाम क्यों हटाया गया? मुनगंटीवार
इस बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने सोमवार को दावा किया कि उनका नाम एक दिन पहले शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में था, लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया। मंत्रिपरिषद में जगह नहीं मिलने के एक दिन बाद मुनगंटीवार ने कहा कि वह न तो परेशान हैं और न ही निराश। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संकेत दिया है कि भाजपा नेतृत्व मुनगंटीवार को कोई अन्य भूमिका सौंप सकता है।
पूर्व वन मंत्री ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के लिए काम करना जारी रखूंगा और विधानसभा में उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों को उठाऊंगा। सात बार के भाजपा विधायक ने कहा, 'मेरे लिए परेशान होने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि पार्टी मुझे जो भी भूमिका सौंपती है, मैं उसे निभाता हूं। एकमात्र मुद्दा यह है कि मुझे बताया गया था कि मेरा नाम मंत्रियों की सूची में था, लेकिन कल यह वहां नहीं था। मुझे नहीं पता कि मेरा नाम क्यों हटा दिया गया। हो सकता है कि भाजपा ने मेरे लिए कोई अन्य जिम्मेदारी तय कर रखी हो।
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महायुति सरकार की पहली कैबिनेट बैठक
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शिवसेना विधायक ने पार्टी के पदों से दिया इस्तीफा
शिवसेना विधायक नरेंद्र भोंडेकर ने महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। भोंडेकर ने भंडारा जिले में रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी के प्रमुख एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उन्हें मंत्रिमंडल में जगह देने का वादा किया था। भोंडेकर शिवसेना के उपनेता और पूर्वी विदर्भ जिलों के समन्वयक हैं। उन्होंने 20 नवंबर के विधानसभा चुनाव में अपने कांग्रेसी प्रतिद्वंद्वी को 38,000 से अधिक मतों के अंतर से हराकर भंडारा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी।
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महायुति में कोई विवाद नहीं- फडणवीस
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विभागों का आवंटन दो-तीन दिन में: फडणवीस
इस बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि नए मंत्रियों को अगले दो-तीन दिनों में विभागों का आवंटन कर दिया जाएगा। फडणवीस ने कहा कि महायुति के सहयोगी दलों ने मंत्रियों के कार्यकाल के दौरान उनके प्रदर्शन की ऑडिट कराने पर सहमति जताई है। हालांकि, फडणवीस ने इसकी कोई समय सीमा नहीं बताई, लेकिन उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि उनकी पार्टी से बनाए गए मंत्रियों को ढाई साल का कार्यकाल मिलेगा। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी कहा कि अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वालों को ढाई महीने में भी बदला जा सकता है।