- उपर देखने के लिए 7 डिग्री व नीचे की ओर देखना है तो 45 डिग्री का एंगल रहेगा
- वजन डेढ़ किलोग्राम से अधिक नहीं होगा
- पीछे से आने वाले वाहनों के हॉरन की आवाज दस डेसीबल से अधिक नहीं प्रभावित होगी
- हवा आसानी से अंदर-बाहर जा सके, इसके लिए हेलमेट में सूक्ष्म छिद्र रहेंगे
- वाइजर यानी हेलमेट के आगे ठोस प्लास्टिक का पारदर्शी शीशा लगा होगा
- हेलमेट पहनने के बाद वाहन चालक 105 डिग्री एंगल पर दोनों तरफ देख सकेगा
भारत मानक ब्यूरो द्वारा तैयार दो सौ से अधिक कंपनियां आईएसआई मार्का के तहत नया हेलमेट बनाएंगी। इनमें करीब 130 कंपनी दिल्ली में हैं। कई विदेशी कंपनियों को भी नया हेलमेट बनाने का लाइसेंस दिया गया है।
संजय पंत, निदेशक, सिविल इंजीनियरिंग (बीआईएस)
टोपीनुमा हेलमेट है सबसे खतरनाक....
बीआईएस के विशेषज्ञों का कहना है कि भवन निर्माण स्थल या फिर दूसरी जगहों पर सुरक्षा के लिए पहने जाने वाला टोपीनुमा हेलमेट दुपहिया वाहन की सवारी के दौरान सबसे ज़्यादा खतरनाक होता है। सड़क हादसे के दौरान यह हेलमेट चालक या उसके पीछे बैठे व्यक्ति की कोई सुरक्षा नहीं कर पाता है।