1 जून से 6 जुलाई के बीच सामान्यत: देश में 215.3 मि. मी. बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार इसमें 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। अब तक मानसून के दौरान देश में 198.4 मि. मी. ही बारिश हुई है। कम बारिश की वजह से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसका खामियाजा सबसे ज्यादा किसानों को भुगतना पड़ेगा। फसलों का नुकसान होगा, जिससे उनकी आवग में कमी आएगी और ये कमी सीधे भारत की अर्थव्यवस्था को चोट करेगी। इसके अलावा कम बारिश या बारिश न होने की वजह से प्रदूषण में भी बढ़ोतरी होगी।
राजधानी दिल्ली की अगर बात करें तो यहां प्रदूषण भारी मात्रा में व्याप्त है। पिछले दिनों हुई छिटपुट बारिश से काफी हद तक प्रदूषण में कमी आई थी, लेकिन इसके न होने से इसका खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा।
कई राज्यों में मानसून के न आने के क्या हैं कारण
मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां दक्षिण-पश्चिम से ठंडी हवाएं बह रही हैं। आर्द्रता भी बनी हुई है। साथ ही तापमान भी सामान्य या उसके आसपास बना हुआ है, लेकिन झमाझम बारिश नहीं हो रही। बादल बनते तो हैं, लेकिन सिर्फ बूंदाबांदी करके आगे निकल जाते हैं। यहां मूसलाधार बारिश न होने का कारण है कि कम दबाव का क्षेत्र बन ही नहीं रहा और न ही किसी तरह का सिस्टम बन रहा जो बारिश करवा सके। मौसम विभाग के मुताबिक, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बारिश करवाने वाले सिस्टम बन तो रहे हैं, लेकिन वो कमजोर होकर अलग-अलग जगहों पर फैल जा रहे हैं।