जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी पार्टी पीडीपी के यूथ विंग के अध्यक्ष ने तीन दिन पहले सीएम महबूबा मुफ्ती की उद्यमियों के साथ हुई एक बैठक से जुड़ा ट्वीट किया। राज्य में स्थिति अब सामान्य है, लेकिन राज्य में 26 अप्रैल से सोशल मीडिया पर बैन लगा हुआ है। वहीद-उर-रहमान के माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर किए गए पोस्ट पर विरोधी पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद मट्टू ने कड़ी टिप्पणी की है।
मट्टू ने पारा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए कहा कि क्या जम्मू-कश्मीर में सीएम ममता बनर्जी ने ट्विटर पर बैन लगा रहा है? ये बड़ी विडंबना है। पारा ने मट्टू के इस ट्वीट पर कोई रिस्पांस नही किया, लेकिन पारा को उस वक्त शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब मट्टू ने कहा कि सोशल मीडिया पर बैन के वक्त पारा ने ट्वीट कैसे मैनेज किया।
उन्होंने प्रतिबंध को लेकर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। ये सही नहीं है, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पारा के ट्वीट और मट्टू के खुलासे ने जम्मू-कश्मीर के उस छुपे हुए रहस्य का उद्घाटन किया है। ये एक मजाक है कि घाटी में हिंसक विरोध और अफवाहों को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर बैन किया गया है क्योंकि ज्यादातर प्रतिबंधित साइट्स के इस्तेमाल के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का इस्तेमाल कर रहे हैं।