खाद्य पदार्थों की उपलब्धता, अनुकूल पर्यावरण, प्राकृतिक वास में सुधार और झील में झींगों के बाड़ों को खाली करने की वजह से इस वर्ष चिलचिलाती गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी चिल्का झील में डेरा डाले हुए हैं।
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया के सबसे बड़े खारे पानी के लैगून और उसके आस-पास दिन का तापमान 39-41 डिग्री सेल्सियस होने पर भी पिछले वर्षों की तुलना में इस बार गर्मी में चिल्का में बड़ी संख्या में मेहमान परिंदों का बसेरा है। यह झील 132 गांव में रह रहे करीब डेढ़ लाख लोगों को आजीविका का साधन उपलब्ध कराती है। इस झील में ज्यादातर पक्षी कैस्पियन सागर, उत्तरी यूरेशिया, हिमालयी क्षेत्र, साइबेरिया, कजाकिस्तान और पड़ोसी देशों के दूर दराज इलाकों से आते हैं।
सर्दी के शुरू होते ही इनका आना होता है और गर्मी की शुरुआत से वापस जाने लगते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि झील में पक्षियों के डेरा डाले रहने की वजह जलवायु अनुकूलन की परिस्थिति भी मानी जा सकती है।
88 प्रजातियों के 62,947 पक्षी
24 मई को ओडिशा सरकार के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के चिल्का वन्यजीव प्रभाग द्वारा किए गए पक्षियों के वार्षिक ग्रीष्मकालीन सर्वेक्षण के दौरान इस विशाल झील में 88 प्रजातियों के 62,947 पक्षी पाए गए।
- रिपोर्ट के अनुसार, 2022 और 2021 की गर्मियों में क्रमश: 95 प्रजातियों के 57,375 पक्षी और 106 प्रजातियों के 48,728 पक्षी लैगून में देखे गए थे, जबकि 2020 की गर्मियों में 97 प्रजातियों के 45,056 पक्षियों की गणना की गई थी।
- इस गर्मी में पाए गए पक्षियों में 43 प्रजातियों के 54,407 जल पक्षी और 45 प्रजातियों के 8,540 पक्षी पाए गए हैं।
ग्रे-हडेड प्रजाति सबसे अधिक पहुंची... ग्रे-हडेड स्विम्फेन और पर्पल स्वाम्फेन जैसी प्रजातियों को सबसे अधिक संख्या (8,386) में देखा गया, इसके बाद एशियन ओपनबिल्ड-स्टॉर्क (7,454), व्हिस्कर्ड टर्न (5,033), लिटिल कॉर्मोरेंट (4,263) और लिटिल एग्रेट (3,929) का नंबर आता है।
तापमान डेढ़ डिग्री बढ़ा फिर भी बसेरा... रिपोर्ट के अनुसार, शोवेलर, पिंटेल, गडवाल, विजन, कॉमन पोचार्ड जैसी प्रजातियों के पक्षियों ने झील से अपने-अपने गंतव्य की ओर उड़ान भरना शुरू कर दी है, लेकिन कुछ वैडर प्रजातियों कॉमन टील, टफ्ड डक, गार्गनी, कर्ल्यू, पिपिट, व्हाइट आई जैसे आकर्षक परिंदों और अन्य पक्षियों ने उड़ान के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अधिकतर जल पक्षी उथले पानी में रहते हैं और गर्मी के बावजूद झील में पर्याप्त पानी है।