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Maharashtra Politics: 'ये रैली राजनीतिक जमीन बचाने की बेताबी है', राज-उद्धव के साथ आने पर भाजपा का जुबानी हमला

Sat, 05 Jul 2025 03:55 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

Maharashtra Politics: भाजपा ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के एक साथ आने पर निशाना साधा और इसे राजनीतिक मजबूरी बताया है। भाजपा का कहना है कि यह सिर्फ चुनाव जीतने की रणनीति है, न कि मराठी भाषा या संस्कृति की रक्षा के लिए कोई सच्चा आंदोलन। वहीं दोनों भाइयों ने इसे मराठी अस्मिता की जीत बताया था।
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राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की साझा रैली पर भाजपा का हमला - फोटो : ANI
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विस्तार
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महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में शनिवार को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने 20 साल बाद साझा रैली की, जिसे लेकर सत्ताधारी दल भाजपा ने तीखा हमला बोला है। भाजपा नेताओं ने इस रैली को एक 'राजनीतिक फायदे के लिए की गई पारिवारिक मुलाकात' बताया और कहा कि यह सिर्फ नगर निगम चुनावों से पहले अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की बेताब कोशिश थी।
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रैली का मकसद और संदेश
'आवाज मराठिचा' नाम से मुंबई के वर्ली में आयोजित इस रैली में शिवसेना-यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे पहली बार करीब दो दशक बाद एक मंच पर आए। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की उस नीति को रद्द कराने की सफलता का जश्न मनाया जिसमें प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को लागू किया गया था। इस रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि वे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे अब एकजुट हैं और भविष्य में साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, राज ठाकरे ने सीएम देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने वह कर दिखाया जो शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे भी नहीं कर पाए — यानी दोनों भाइयों को एक मंच पर ले आए।

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रैली पर भाजपा नेताओं का हमला
भाजपा नेता अशीष शेलार और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रवीण दरेकर ने इस रैली पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। आशीष शेलार ने कहा- यह भाषा प्रेम नहीं, बल्कि सिर्फ एक राजनीतिक ड्रामा था। 'जो भाई कभी घर से निकाला गया, अब उसे वापस गले लगाया जा रहा है – ये सब सिर्फ भाजपा से डर और आगामी चुनावों की चिंता के चलते किया गया।' उन्होंने आरोप लगाया कि ठाकरे बंधु बीएमसी (मुंबई नगर निगम) की सत्ता दोबारा हासिल कर 'भ्रष्ट शासन' शुरू करना चाहते हैं। वहीं प्रवीण दरेकर ने कहा- यह कार्यक्रम भाषा के नाम पर नहीं, बल्कि एक साफ-सुथरा राजनीतिक स्टंट था। 'उद्धव ठाकरे की बातों में हताशा और सत्ता खोने का दुख साफ झलक रहा था।' उन्होंने दावा किया कि मराठी मतदाता पहले ही भाजपा और महायुति को समर्थन दे चुके हैं।

मंच पर असमंजस और निशानेबाजी
प्रवीण दरेकर ने यह भी कहा कि रैली में झंडों और आमंत्रण को लेकर भी भ्रम था, जिससे साफ हो गया कि यह सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक इवेंट था।  राज ठाकरे की उस टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने कहा था कि देवेंद्र फडणवीस ने वह कर दिखाया जो बाल ठाकरे नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, 'इसे सकारात्मक रूप में लेना चाहिए।'

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भाजपा का पलटवार
उद्धव ठाकरे के इस आरोप पर कि भाजपा अपने सहयोगियों को इस्तेमाल कर छोड़ देती है, दरेकर ने कहा कि उद्धव खुद अपने नेताओं को छोड़ते रहे हैं - जैसे नारायण राणे, छगन भुजबल, रामदास कदम, गणेश नाईक और यहां तक कि राज ठाकरे भी।  उन्होंने याद दिलाया कि जब भाजपा के पास बीएमसी में बहुमत लगभग था, तब भी उन्होंने शिवसेना को मेयर की कुर्सी दी थी।

मराठी भाषा पर राजनीति
दरेकर ने कहा कि मराठी को 'शास्त्रीय भाषा' का दर्जा दिलाने का श्रेय भी सीएम फडणवीस और पीएम मोदी को जाता है। उन्होंने ठाकरे बंधुओं से सवाल किया - जब आप सत्ता में थे तब कितने मराठी बिल्डरों को फायदा पहुंचाया? दरेकर ने कहा कि किसी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन भाषा, जाति या धर्म के आधार पर समाज में विभाजन फैलाना खतरनाक हो सकता है।

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