एक साल पहले जब साध्वी बहनों से रेप के मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह ने सुनारिया जेल में कदम रखा, तब उसका वजन 105 किलो था। इन 12 महीनों में वजन करीब 92 किलो ही रह गया है। चेहरे की चमक फीकी पड़ी है तो दाढ़ी सफेद हो चुकी है।
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आगे के हिस्से पर काली है। सिर के बाल पहले की तरह लंबे हैं। वजन घटने की वजह चिंता है या व्यायाम, यह खुद बाबा को पता है। मगर वह सेहत के प्रति अलर्ट है। 12 माह में राम रहीम का 13 किलो वजन घटा, आधी दाढ़ी सफेद हो गई है।
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सुबह पांच बजे से रात 10 बजे सोने तक बाबा की जिंदगी एक सामान्य कैदी की तरह है। सब्जियां शिद्दत से उगाता है। मनोरंजन के लिए बैडमिंटन खेलता है। मॉर्निंग-ईवनिंग वॉक के अलावा योग करता है। कभी-कभी कोठरी में अंगीठी पर सब्जी की छौंक भी लगाता है।
वॉकिंग और योग से दिन की शुरुआत
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बाबा की बैरक करीब आधा एकड़ में है। चारों तरफ आठ फीट ऊंची दीवार है। कोठरी करीब 15 फीट लंबी और 10 फीट चौड़ी है। वह सुबह पांच से साढ़े पांच बजे के बीच कोठरी से निकल कर एक घंटे तक कॉरिडोर में घूमता है। योग करता है।
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साढ़े छह बजे दूसरे कैदियों की तरह बाबा को अपनी बैरक के लॉन में भेज दिया जाता है, जहां उसने सब्जियां उगाई हुई है। वह करीब दो घंटे सब्जियों का रखरखाव करता है। साढ़े 8 बजे ब्रेकफास्ट के बाद किसी केस में सुनवाई है तो वीडियो कांफ्रेंसिंग में उसका आधा दिन गुजर जाता है। किताबें पढ़ता है।
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मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में दिलचस्पी
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वैसे तो डेरा प्रमुख की कोठरी में गीता भी रखी हुई है मगर वह धार्मिक साहित्य के अलावा प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को पढ़ने में ज्यादा दिलचस्पी रखता है। आजकल उसे प्रेमचंद की कहानियां अच्छी लगती हैं।
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देश के महान विभूतियों की बायोग्राफी पढ़ने का भी बाबा को शौक है। कोठरी में उसके साथ बंद नंबरदार ही बैडमिंटन खेलते हैं। अगर रैकेट की तार टूट जाती है तो बाबा खुद उसे ठीक करता है। इसके अलावा लूडो खेलकर भी टाइमपास करता है।
बाबा ने मां, पत्नी, पुत्र, पुत्रवधु, दो बेटियों, दो दामाद, डेरे की डिप्टी मैनेजर शोभा गेरा और हनीप्रीत का नाम मुलाकातियों में लिखवाया था। इनमें हनीप्रीत को छोड़कर बाकी 9 रूटीन में मिलते हैं।