महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार ने बृहस्पतिवार को लाड़की बहिन योजना को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लाड़की बहिन योजना के तहत वितरित धनराशि की वसूली नहीं की जाएगी। पिछले दिनों विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार लाड़की बहिन योजना के लाभार्थियों की सूची में कटौती करेगी। इसके बाद अपात्रों से धनराशि की कटौती की जाएगी और योजना को बंद कर देगी।
इस पर डिप्टी सीएम अजित पवार ने कहा कि पिछली बार हमारे पास संभावित लाभार्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए सीमित समय था। हम हर लाभार्थी के आधार कार्ड को योजना से जोड़ना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इस बार लाभार्थियों के आधार कार्ड को योजना से लिंक किया जाएगा। मगर लाभार्थियों से पैसे की कोई वसूली नहीं की जाएगी।
शरद पवार के साथ साझा किया मंच
पुणे में वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट में एक कार्यक्रम में डिप्टी सीएम अजित पवार ने एनसीपी (शरद) के प्रमुख शरद पवार के साथ मंच साझा किया। शरद पवार से हुई चर्चा को लेकर डिप्टी सीएम ने कहा कि हमने चीनी से जुड़े मामलों पर बात की। सहकारिता, आबकारी, कृषि और बिजली विभाग चीनी कारोबार से जुड़े हैं। हमने वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने कृषि विभाग के कामकाज की समीक्षा की और सरकारी योजनाओं के संभावित दुरुपयोग को उजागर किया।
अजित पवार ने कहा कि जब सरकार लोगों के लाभ के लिए योजनाएं शुरू करती है, तो हमेशा कुछ बेईमान तत्व इसका गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। ऐसा ही मामला एक रुपये की फसल बीमा योजना के साथ भी हुआ है। इससे पहले महाराष्ट्र के कृषि मंत्री माणिकराव कोकाटे ने कहा था कि किसानों के लिए एक रुपए की फसल बीमा योजना के कार्यान्वयन में अनियमितताएं हैं। लाभ प्राप्त करने के लिए पूजा स्थलों तक को कृषि भूमि के रूप में दिखाया गया है।
प्रभारी मंत्रियों को लेकर शिवसेना और एनसीपी के बीच टकराव पर पवार ने कहा कि जिले के प्रभारी मंत्रियों की जिम्मेदारी अपने कैबिनेट सहयोगियों को सौंपना मुख्यमंत्री (देवेंद्र फडणवीस) का विशेषाधिकार है। दावोस से लौटने के बाद वह इस पर फैसला लेंगे।
महिलाओं को मिलता है योजना का लाभ
2024 के विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई लाड़की बहिन योजना आर्थिक रूप से वंचित वर्गों की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये का मासिक भत्ता प्रदान करती है। महाराष्ट्र में योजना के 2.43 करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं। इससे राज्य के खजाने पर हर महीने लगभग 3,700 करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है। पिछले साल महाराष्ट्र चुनाव में महायुति की जीत का श्रेय लाड़की बहिन योजना को दिया गया था। इसमें मासिक राशि बढ़ाकर 2,100 रुपये करने का वादा किया गया है।