उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना की नेता नीलम गोरे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गई हैं। वहीं, भाजपा की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने कांग्रेस में शामिल होने वाली सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीतिक गलियारों में उथल- पुथल जारी है। उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है। विधान परिषद की उपसभापति और उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना की नेता नीलम गोरे शुक्रवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गईं। वहीं, भाजपा की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने कांग्रेस में शामिल होने वाली सभी अटकलों को खारिज कर दिया है।
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मुंडे करेगी मनहानि का केस
भाजपा की राष्ट्रीय सचिव पंकजा मुंडे ने कहा कि कुछ दिन पहले एक खबर आई थी कि मैं राहुल गांधी और सोनिया गांधी से दो बार मिली हूं। मैं भाजपा छोड़ रही हूं और कांग्रेस में शामिल हो रही हूं। ऐसी खबरें बिल्कुल झूठी हैं।
उन्होंने कहा कि मैं शपथ लेती हूं कि मैंने कभी किसी पार्टी के नेता से उनकी पार्टी में शामिल होने के संबंध में बात नहीं की। मैंने कभी राहुल गांधी या सोनिया गांधी को व्यक्तिगत रूप से नहीं देखा। मैं चैनल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने जा रही हूं। उन्होंने कहा कि मेरा करियर कोई कौड़ी मोल का नहीं है, लाखों लोग मुझसे जुड़े हुए हैं। मेरी प्रतिष्ठा पर भी इससे सवाल खड़ा होता है।
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नीलम गोरे ने पाला बदला
वहीं, दूसरी ओर विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरे ने अपना पाला बदल दिया है। वह उद्धव ठाकरे गुट वाली शिवसेना को छोड़कर शिंदे गुट में शामिल हो गई हैं। गोरे ने शुक्रवार को सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की है।
नीलम गोरे उद्धव ठाकरे की काफी करीबी मानी जाती थीं। अब ऐसे में उनका पार्टी बदलना उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका है। नीलम शिवसेना के टूटन के बाद से अब तक उद्धव ठाकरे गुट की नेता थीं। नीलम साल 2002 से लगातार विधान परिषद के लिए चुनी जा रही हैं। साल 2002, 2008, 2014 और 2020 में 4 बार विधानपरिषद के लिए चुनी जा चुकीं हैं। वहीं, सात जुलाई 2022 से महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति हैं।