बर्लिन में अनाथालय में रह रही दो वर्षीय अरिहा शाह की भारत वापसी के लिए जैन समुदाय ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित जर्मन वाणिज्य दूतावास के बाहर रविवार को प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों में शामिल विक्रम बोहार ने कहा, हमने प्रधानमंत्री कार्यालय व विदेश मंत्रालय से तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है। किसी भी बच्ची को उसकी मां के प्यार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
अरिहा को उसकी मां, संस्कृति व वातावरण की जरूरत है। हम चाहते हैं कि अरिहा की परवरिश जैन समुदाय में हो। जर्मन सरकार उसे ले गई है। शुरुआत में उसके माता-पिता पर कुछ आरोप थे, लेकिन अब सबकुछ साफ हो चुका है।
बता दें कि पिछले महीने ही बर्लिन की पैंको स्थानीय अदालत ने अरिहा के माता-पिता धारा और भावेश शाह की बच्ची को आकस्मिक चोट की दलील काे खारिज करते हुए उसकी कस्टडी वापस जर्मन स्टेट को सौंप दी थी। एजेंसी
जर्मनी में भी हुआ था प्रदर्शन
हफ्ते की शुरुआत में भारतीय समुदाय ने जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में भी प्रदर्शन किया था। उन्होंने 23 सिंतबर, 2021 से फॉस्टर केयर में रह रही अरिहा को भारत भेजने की मांग की थी। फॉस्टर केयर वह जगह होती है, जहां वे बच्चे रखे जाते हैं, जिनके माता-पिता की मौत हो चुकी होती है या वे उनकी देखभाल करने में सक्षम नहीं होते।
विदेशमंत्री ने भी उठाया था मुद्दा
पिछले साल दिसंबर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने जर्मन समकक्ष एनालेना बेयरबॉक के समक्ष इस मुद्दे को उठाया था। अरिहा की मां धरा शाह का कहना है कि सितंबर 2021 में बच्ची को उसकी दादी से दुर्घटनावश चोट लग गई थी, जिसके बाद जर्मन अधिकारियों ने उसे अपनी अभिरक्षा में ले लिया था।