नवंबर महीने का आखिरी दिन और नोटबंदी का 22वां दिन लोगों के लिए परेशानी लेकर आ रहा है। ज्यादातर कार्पोरेट ऑफिस में आज एम्प्लॉईज की सैलरी उनके बैंक अकाउंट में डाल दी जाएगी। महीने भर से सैलरी के इंतजार में बैठे लोगों के लिए सैलरी वाला दिन बहुत ही एक्साइटेड होता है। हालांकि नोटबंदी के चलते बैंको और एटीएम में लगी लंबी लाइनें लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है। जो लाइनें अभी छोटी हो रही थी वो अब और बड़ी हो सकती हैं।
कैश नहीं है लेकिन उधारी भी चुकानी है
नोटबंदी के बाद से कई लोगों ने दोस्तों से उधार लेकर काम चलाया है तो कई लोगों ने मकान मालिक का किराया रोककर। अब जब सैलरी आएगी तो उधारी चुकाने के लिए घर के लिए महीने भर का सामान खरीदने के लिए लोगों को पैसों की जरूरत पड़ेगी।
ऐसे में लोग सीधा एटीएम या बैंकों का रुख करेंगे, लेकिन परेशानी की बात यह है कि 8 नवंबर को हुई नोटबंदी की घोषणा के बाद से बैंकों व एटीएम में कैश की कमी देखी जा रही है। लंबी लाइनें थोड़ी छोटी जरूर पड़ी हैं लेकिन लाइनें बरकरार हैं। हालांकि आरबीआई बैंकों में कैश की कमी को लेकर लगातार प्रयासरत है लेकिन फिर भी यह दो एक दिन में सुधरने वाला नहीं है।
मकान मालिकों का ऑनलाइन किराया लेने से इनकार
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आरबीआई ने लोगों को सुझाव दिया है कि ऑनलाइन (इलेक्टॉनिक) भुगतान करें, लेकिन दूध से लेकर सब्जी वाले अभी भी ऑनलाइन माध्यम से अपरिचित हैं। ऐसे में रोजमर्रा की छोटी-मोटी चीजों के लिए लोगों को परेशानी हो सकती है। यहां तक कि मकान मालिक भी ऑनलाइन पैसे लेने से दूरी बना रहे हैं। मकान मालिकों का कहना है कि उनके अकाउंट में पहले से ही पैसे हैं जिन्हें वे अभी तक कैश नहीं करा पाए हैं।
ऐसे में किराए पर रह रहे लोगों के लिए यह भी चुनौती है। एटीएम की लाइन में लगकर अगर पैसे निकाल भी लो तो एक बार में 2500 रुपए ही निकलेंगे। मयूर विहार एक्सटेंशन में रहने वाले रवि पारीक का कहना है कि, "मैंने पिछले महीने किराए के पैसे देने लिए 10 हजार रुपए एटीएम से निकाले थे लेकिन किन्हीं कारणवश थोड़ा लेट हो गया और 8 नवंबर को नोटबंदी का फैसला हो गया। मकान मालिक ने पुराने नोट लेने से मना कर दिया। किसी तरह लाइनों में लग-लगकर नोट बदलाए और पिछले महीने का किराया निपटाया। हमने मकान मालिक से उसके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने को कहा लेकिन उसने मना कर दिया।"
ऐसी ही कई लोगों की समस्या हैं जिन्हें अभी तक कोई समाधान होता नहीं दिख रहा।
एटीएम काम नहीं कर रहे, बैंकों में कैश की कमी
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वहीं आरबीआई का कहना है कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग सिस्टम में 8 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं, लेकिन कई शहरों में अभी भी एटीएम काम नहीं कर रहे हैं। एक सोचने वाली बात है कि राजधानी दिल्ली में एटीएम काम नहीं कर रहे हैं तो शहरों से दूर के गांवों का क्या हाल होगा।
राजधानी दिल्ली में बैंकों के खुलने से पहले लोग लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं उन्हें डर रहता है कि घंटों लाइन में लगने के बाद कहीं बैंक यह न कह दे कि 'कैश खत्म' हो गया। हालांकि आरबीआई समय-समय पर लोगों को सूचित कर रही है कि 'कैश की कमी नही है, लोग परेशान न हों।'
पैसे तो मिल गए लेकिन छुट्टे कहां कराएं
नोटबंदी के बाद लोगों को एक नई समस्या सता रही है छुट्टे कराने की। ज्यादातर एटीएम में अभी केवल 2000 का नोट ही निकल रहा है। आरबीआई ने अभी तक इस बात की घोषणा नहीं की है कि कितने बैंकों में 500 और 100 के नोट डाले गए हैं। लोगों को छोटी-मोटी चीज खरीदने के लिए खुले पैसों की जरूरत पड़ती है। लेकिन 2000 का नोट छुट्टा कराने में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
परेशानी तो है लेकिन फैसला अच्छा है
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नोटबंदी पर जहां विपक्ष सरकार को घेरने के लिए हर रोज नई रणनीति बना रहा है तो वहीं जनता सरकार के फैसले को समर्थन दे रही है। कालाधन को रोकने के लिए पीएम मोदी के नोटबंदी के फैसले का काफी लोग परेशानी उठाने के बाद भी समर्थन कर रहे हैं जो कि सरकार के लिए भी एक राहत की खबर है। 28 नवंबर को विपक्षी पार्टियों द्वारा भारत बंद आह्वान किया था लेकिन उन्हें जनता का सहयोग न मिल सका।