रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने बृहस्पतिवार को कहा कि तात्कालिक परेशानियों के बावजूद दीर्घकाल में नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि वित्तीय बाजार में कभी-कभार आ रहे उथल-पुथल से बचाव जरूरी है।
छमाही वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के प्रस्तावना में पटेल ने कहा है कि खास मूल्य के नोटों को वापस लिए जाने का फैसला भविष्य में व्यापक असर डालेगा। ऐसी संभावना है कि इससे घरेलू अर्थव्यवस्था पूरी तरह परिवर्तित हो जाए। उन्होंने कहा कि भुगतान के डिजिटल तरीके को मिल रहे बढ़ावा से जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।
हालांकि उन्होंने नोटबंदी की वजह से लोगों को हुई परेशानी की बात स्वीकार की है। पटेल ने आगे लिखा है कि जीएसटी और बैंक्रप्सी कोट जैसे सुधारों का भी अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा है कि जहां तक घरेलू वृहद अर्थव्यवस्था की बात है तो स्थित अब भी स्थिर है, महंगाई की दर नियंत्रण में है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के दिनों में विकास की गति पर असर पड़ा है।
उन्होंने कहा है कि देश घरेलू बाध्यताओं से समझौता किए बिना बैंकिंग व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय मानक को अपना रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट ने बैंकों को जोखिम लेने की क्षमता का परीक्षण करने को मजबूर किया है और पिछले साल इन्होंने ऐसा किया भी। बैंकों ने अपनी संपत्तियों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया और उसी के अनुरूप सुधारात्मक कदम भी उठाए।