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नोटबंदी ने फेरा वित्तमंत्री जेटली के मंसूबों पर पानी

Mon, 23 Jan 2017 07:53 PM IST
एजेंसी/दिल्ली
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- फोटो : self
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आगामी आम बजट के जरिए सुधार के बड़े फैसले लेने के मंसूबे बना चुके वित्तमंत्री अरुण जेटली का कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फैसले ने बांध दिया है। जेटली की लाचारी के पीछे प्रधानमंत्री का नोटबंदी का वह फैसला है, जिसकी वजह से बजट में उस हिसाब से फैसले नहीं ले सकेंगे, जिसकी योजना पहले से बनी थी।
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अब, जबकि अगले सप्ताह ही संसद में आम बजट पेश होना है, जेटली पर इस बात का दबाव रहेगा कि वह नोटबंदी की वजह से मिले दर्द को बांटने के लिए लोक लुभावन फैसले लें।

उन पर पूंजीगत खर्च के साथ लोक कल्याणकारी कार्यों पर खर्च बढ़ाने का दबाव रहेगा। हालांकि उन्हें यह भी पता है कि नोटबंदी की वजह से अगले साल अर्थव्यवस्था की हालत वैसी नहीं रहेगी, जैसी कल्पना थी। इसका असर राजस्व वसूली पर भी पड़ेगा। 
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बैंक से कैश‌ निकालने पर लगेगा टैक्स!

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए कैश निकालने पर भी टैक्स लगा सकती है सरकार। सूत्रों के अनुसार सरकार इस पर विचार कर रही है और अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इसे 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में जगह मिल सकती है।

सरकार बैंक खातों से एक तय सीमा से अधिक कैश निकालने पर यह टैक्स लगा सकती है। सरकार ने पिछले साल नवंबर में नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजैक्शंस बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। 

एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘कैश टैक्स पर अभी विमर्श हो रहा है। बजट के साथ इसका ऐलान किए जाने की काफी संभावना है।’गौरतलब है कि कालेधन पर बनी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने 3 लाख रुपए से ज्यादा के कैश सौदों पर पाबंदी लगाने का सुझाव दिया था। उसने एक आदमी के लिए कैश होल्डिंग की 15 लाख रुपए की सीमा तय करने की भी सिफारिश की थी।
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