केंद्र सरकार अभी तक यह कहती आ रही थी कि उसने नोटबंदी का फैसला आरबीआई के सुझाव पर लिया है। लेकिन सरकार के दावे के उलट आरबीआई ने बीतें माह संसदीय समिति को सौपें गए अपने रिपोर्ट में बताया कि नोटबंदी का सुझाव सरकार की तरफ से आया था, और आरबीआई ने सरकार के कहने पर ही 500 और 1000 रुपये के नोटों को वापस लेने का फैसला किया।
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक वित्त विभाग से जुड़ी संसदीय समिति को लिखे अपने 7 पन्नों के जवाब में आरबीआई ने बताया, 'सरकार ने 7 नवंबर को आरबीआई को 500 और 1000 रुपये के नोटों की कानूनी मान्यता समाप्त करने का सुझाव दिया। सरकार ने बताया कि इससे जाली नोट, काला धन और आतंकवाद की फंडिग की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।' आरबीआई ने 22 दिसंबर को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली इस संसदीय समिति के सामने अपना जवाब सौंपा था।
आरबीआई ने अपने जवाब में बताया कि सरकार ने कहा, 'नकदी की कालेधन में अहम भूमिका होती है। कालेधन के खात्मे से भारतीय अर्थव्यवस्था मजूबत होगी और भारत के विकास पर इसका सकरात्मक असर पड़ेगा। बीतें पांच सालों से 500 और 1000 के नोटों का चलन तेजी से बढ़ा हैं जिससे जाली नोटों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।'